भरत तिवारी एनकाउंटर कांड: पीड़ित परिवार से मिलने बिलौटी पहुंचे प्रशांत किशोर, नीतीश सरकार को घेरा, निष्पक्ष जांच की मांग
- mdkashif3300
- 14 hours ago
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भरत तिवारी एनकाउंटर कांड: पीड़ित परिवार से मिलने बिलौटी पहुंचे प्रशांत किशोर, नीतीश सरकार को घेरा, निष्पक्ष जांच की मांग
बिहार में पुलिस एनकाउंटर और कानून-व्यवस्था को लेकर छिड़ा सियासी घमासान रुकने का नाम नहीं ले रहा है। चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने राज्य के राजनीतिक पारे को एक बार फिर से बेहद गर्म कर दिया है। इस संवेदनशील मामले में एक नया और महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब चुनावी रणनीतिकार और 'जन सुराज अभियान' के सूत्रधार प्रशांत किशोर पीड़ित परिवार से मिलने नालंदा के बिलौटी गांव पहुंचे। पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उनका दुख साझा करने के बाद प्रशांत किशोर ने बिहार सरकार, गृह विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर बेहद तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि बिहार में कानून के शासन की जगह प्रशासनिक मनमानी हावी होती जा रही है।
बिलौटी गांव में पीड़ित परिवार के बीच पहुंचे प्रशांत किशोर
गौरतलब है कि पिछले दिनों पुलिस एनकाउंटर में बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की मौत हो गई थी। पुलिस का दावा था कि वह एक अपराधी था और मुठभेड़ में मारा गया, जबकि परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह एक सोची-समझी साजिश के तहत किया गया 'फर्जी एनकाउंटर' है। इसी सिलसिले में पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने प्रशांत किशोर बिलौटी गांव पहुंचे।
उन्होंने भरत तिवारी के शोकाकुल परिजनों के साथ काफी समय बिताया, घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी ली और परिवार की बात को ध्यानपूर्वक सुना। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, जन सुराज के समर्थक और युवा भी मौके पर मौजूद रहे, जो लगातार पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में आक्रोश व्यक्त कर रहे थे।
"लोकतंत्र में कानून से ऊपर कोई नहीं" - प्रशांत किशोर का हमला
परिजनों से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए प्रशांत किशोर ने नीतीश सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "किसी भी लोकतांत्रिक देश या राज्य में कानून और न्यायिक प्रक्रिया से ऊपर कोई नहीं हो सकता। पुलिस को अपराधियों को पकड़ने और उन्हें सजा दिलाने का अधिकार कानून के दायरे में रहकर है, न कि किसी की जान लेकर स्वयं न्यायधीश बन जाने का। यदि इस मुठभेड़ में कानूनी और मानवाधिकार नियमों का पालन नहीं किया गया है, तो यह बेहद गंभीर मामला है।"
प्रशांत किशोर ने जोर देकर कहा कि इस एनकाउंटर की निष्पक्ष, स्वतंत्र और उच्च स्तरीय न्यायिक जांच होनी चाहिए ताकि सच सामने आ सके और अगर पुलिसकर्मियों ने अधिकारों का दुरुपयोग किया है, तो उन पर सख्त कार्रवाई हो।
प्रशासनिक जवाबदेही और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल
जन सुराज के सूत्रधार ने बिहार में प्रशासनिक जवाबदेही खत्म होने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आज बिहार की जनता पुलिस और प्रशासन के रवैये से त्रस्त है। भ्रष्टाचार और अपराधियों पर लगाम लगाने के नाम पर निर्दोषों को निशाना बनाने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।
उन्होंने पूछा कि आखिर क्यों हर संदिग्ध कार्रवाई के बाद सरकार जांच से पीछे हटती है? प्रशांत किशोर ने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए वे और उनकी टीम हर स्तर पर आवाज उठाएंगे। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि मामले की जांच में किसी भी तरह की लीपापोती को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पारदर्शी तरीके से पूरी रिपोर्ट जनता के सामने रखी जानी चाहिए।
बिहार में गरमाई एनकाउंटर पॉलिटिक्स, विपक्ष लामबंद
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार के राजनीतिक हलकों में भी सरगर्मी चरम पर है। प्रशांत किशोर से पहले पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव भी बिलौटी गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात कर चुके हैं और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। विपक्षी दलों (राजद, कांग्रेस और वामदल) ने भी इस एनकाउंटर को लेकर सरकार को सदन से सड़क तक घेरने की रणनीति तैयार कर ली है।
दूसरी ओर, सत्तापक्ष (जेडीयू और बीजेपी) का कहना है कि पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ कानून सम्मत कार्रवाई की है और पुलिस का मनोबल गिराने के लिए विपक्ष इस मुद्दे पर राजनीति कर रहा है।
जांच और न्याय की दिशा पर टिकी सबकी निगाहें
बिलौटी गांव की इस घटना ने बिहार पुलिस की एनकाउंटर पॉलिसी पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशा-निर्देशों के तहत पुलिस मुठभेड़ में मौत के मामलों की मजिस्ट्रेट जांच अनिवार्य होती है। अब जबकि जन सुराज के प्रशांत किशोर और सांसद पप्पू यादव जैसे कद्दावर चेहरे सीधे तौर पर पीड़ित परिवार के साथ खड़े हो गए हैं, प्रशासन पर इस मामले में निष्पक्षता दिखाने का भारी दबाव है। देखना होगा कि आने वाले दिनों में गृह विभाग इस मामले में कोई उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करता है या यह मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रह जाता है।
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