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मधुबनी: चलती पुलिस गाड़ी में रुपये बांटने का वीडियो वायरल, महिला ASI सोनल कुमारी समेत 3 पुलिसकर्मी सस्पेंड

  • mdkashif3300
  • 8 hours ago
  • 3 min read

मधुबनी: चलती पुलिस गाड़ी में रुपये बांटने का वीडियो वायरल, महिला ASI सोनल कुमारी समेत 3 पुलिसकर्मी सस्पेंड


बिहार पुलिस की छवि को धूमिल करने और खाकी को दागदार करने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला मधुबनी जिले से सामने आया है। यहाँ सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें पुलिस गश्ती गाड़ी के अंदर कुछ पुलिसकर्मी वर्दी में बैठकर आपस में रुपयों का बंटवारा करते हुए साफ दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो के इंटरनेट पर प्रसारित होते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मधुबनी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) योगेंद्र कुमार ने त्वरित कार्रवाई की और जांच रिपोर्ट के आधार पर एक महिला सहायक उप निरीक्षक (ASI) और दो सिपाहियों समेत तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।


चलती गश्ती गाड़ी के अंदर हो रहा था रुपयों का बंटवारा

दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ यह वीडियो मधुबनी जिले के अररिया संग्राम थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि पुलिस की सरकारी गाड़ी (बोलेरो) गश्त पर निकली हुई है और गाड़ी चल रही है। इसी दौरान पीछे की सीट पर बैठीं एक महिला पुलिस अधिकारी और सिपाही आपस में कुछ नोटों की गड्डियों को गिनते हैं और फिर उन्हें आपस में बांट लेते हैं। इस दौरान वे बेहद सामान्य अंदाज में बातचीत भी कर रहे हैं, मानो यह उनके रोजमर्रा के काम का हिस्सा हो। किसी तीसरे व्यक्ति या गाड़ी में ही मौजूद किसी शख्स ने इसका चुपके से वीडियो बना लिया और उसे सोशल मीडिया पर डाल दिया, जिसके बाद यह आग की तरह फैल गया।


एसपी ने झंझारपुर एसडीपीओ को सौंपी जांच

जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और स्थानीय स्तर पर इसकी चर्चा तेज हुई, मामला मधुबनी के पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार के संज्ञान में आया। एसपी ने पुलिस विभाग की छवि पर लगे इस धब्बे को गंभीरता से लेते हुए तुरंत झंझारपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) को इस मामले की जांच करने और वीडियो की सत्यता की पुष्टि करने का निर्देश दिया। एसडीपीओ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वीडियो की जांच की और उसमें दिख रहे पुलिसकर्मियों की पहचान की।


निलंबित पुलिसकर्मियों की हुई पहचान

झंझारपुर एसडीपीओ की जांच रिपोर्ट में वीडियो में दिख रहे पुलिसकर्मियों की पहचान अररिया संग्राम थाना में पदस्थापित निम्नलिखित पुलिसकर्मियों के रूप में हुई:

1. एएसआई सोनल कुमारी (महिला सहायक उप निरीक्षक)

2. सिपाही गौतम कुमार (कांस्टेबल)

3. महिला सिपाही सौंदर्या राय (महिला कांस्टेबल)


जांच रिपोर्ट में इन तीनों पुलिसकर्मियों द्वारा ऑन-ड्यूटी सरकारी वाहन में संदिग्ध तरीके से रुपयों का लेन-देन और बंटवारा करने को सेवा नियमावली का गंभीर उल्लंघन और घोर अनुशासनहीनता माना गया।


एसपी योगेंद्र कुमार की बड़ी कार्रवाई, विभागीय जांच शुरू

एसडीपीओ की जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के तुरंत बाद मधुबनी के पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार ने कड़ा रुख अपनाते हुए एएसआई सोनल कुमारी, सिपाही गौतम कुमार और महिला सिपाही सौंदर्या राय को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान तीनों पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन से संबद्ध कर दिया गया है। एसपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस बल में भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के लिए कोई स्थान नहीं है। हालांकि, पुलिस अधीक्षक ने यह भी कहा कि वायरल वीडियो में बांटे जा रहे रुपयों का स्रोत (सोर्स) क्या था और यह पैसा कहां से आया था, इसकी गहराई से जांच की जा रही है।


वसूली का हिस्सा होने की आशंका, उठ रहे कई सवाल

भले ही पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया हो, लेकिन इस घटना ने बिहार पुलिस की गश्ती व्यवस्था और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर यह कयास लगाए जा रहे हैं कि यह पैसा नेशनल हाईवे या स्थानीय सड़कों पर ट्रकों, ओवरलोडेड वाहनों या अवैध धंधेबाजों से की गई अवैध वसूली (उगाही) का हिस्सा हो सकता है, जिसे ड्यूटी खत्म होने के बाद आपस में बांटा जा रहा था। पुलिस की विभागीय जांच में इस बात का पता लगाया जा रहा है कि यह पैसा किसका था और इसे किस एवज में लिया गया था।


खाकी पर उठते सवाल और जनता का भरोसा

बिहार में हाल के दिनों में पुलिसकर्मियों के अवैध वसूली और रिश्वतखोरी के कई मामले और वीडियो सामने आए हैं। मधुबनी की यह घटना दर्शाती है कि वरिष्ठ अधिकारियों की सख्ती के बावजूद निचले स्तर पर भ्रष्टाचार पर पूरी तरह लगाम लगाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। हालांकि, एसपी योगेंद्र कुमार द्वारा की गई त्वरित निलंबन की कार्रवाई से यह संदेश जरूर गया है कि ऐसी गंदी हरकतों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभागीय जांच में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या इन पुलिसकर्मियों पर सेवा से बर्खास्तगी जैसी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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