बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी का बड़ा बयान: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में DSP निलंबित, शिक्षकों को दी समय पर स्कूल आने की नसीहत
- mdkashif3300
- 7 hours ago
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बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी का बड़ा बयान: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में DSP निलंबित, शिक्षकों को दी समय पर स्कूल आने की नसीहत
बिहार की राजधानी पटना में आयोजित जनता दरबार के दौरान सूबे के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली और राज्य की समसामयिक कानून-व्यवस्था को लेकर कई बड़े और महत्वपूर्ण बयान दिए हैं। मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता "न्याय के साथ विकास" है। सरकार का यह निरंतर प्रयास है कि आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान उनके स्थानीय स्तर (ब्लॉक और जिला स्तर) पर ही हो जाए। इसके लिए विभाग आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म का व्यापक इस्तेमाल कर रहा है ताकि शिकायतों का समयबद्ध और तेजी से निपटारा सुनिश्चित किया जा सके।
भरत तिवारी एनकाउंटर कांड पर कड़ी कार्रवाई, संबंधित डीएसपी निलंबित
चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि सरकार इस मामले को लेकर बेहद गंभीर और संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि घटना की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने तुरंत कड़े कदम उठाए हैं।
मंत्री के अनुसार, "त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित पुलिस उपाधीक्षक (DSP) समेत घटना में शामिल अन्य दोषी अधिकारियों को उनके पदों से हटाते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है।" इसके अलावा, इस मामले में संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज की गई है और पूरे मामले की न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) के आदेश दे दिए गए हैं। शिक्षा मंत्री ने आम जनता और राजनीतिक दलों से अपील की कि वे जांच पूरी होने तक धैर्य बनाए रखें और देश की न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा रखें।
आलोक मेहता के बयान पर पलटवार, शिक्षकों को समय पर स्कूल आने की नसीहत
शिक्षा विभाग की नियमावली और निरीक्षण व्यवस्था को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता आलोक मेहता द्वारा दिए गए बयानों पर तीखा पलटवार करते हुए शिक्षा मंत्री ने दोटूक बात कही। उन्होंने कहा कि बिहार में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना सरकार का प्रमुख लक्ष्य है और इसके लिए सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को अपनी जिम्मेदारियों का पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निर्वहन करना होगा।
आलोक मेहता के आरोपों को खारिज करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा, "हमारी सरकार स्कूलों में बिजली, पेयजल, बेंच-डेस्क, कंप्यूटर और पुस्तकालय जैसी तमाम बुनियादी ढांचागत सुविधाएं तेजी से उपलब्ध करा रही है। ऐसे में शिक्षकों का भी यह नैतिक और कानूनी दायित्व बनता है कि वे निर्धारित समय पर विद्यालय पहुंचें और बच्चों को पूरी लगन से पढ़ाएं। शिक्षकों की समयबद्ध उपस्थिति में किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में चर्चाएं तेज
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के इन बयानों के बाद बिहार की राजनीति और शैक्षणिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। एक तरफ जहां सरकार के समर्थकों का कहना है कि शिक्षकों की समयबद्धता सुनिश्चित करने से सरकारी स्कूलों की स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव आएगा, वहीं शिक्षक संघों का एक वर्ग बायोमेट्रिक अटेंडेंस और अत्यधिक निरीक्षण के नियमों को लेकर अपनी असहमति जता रहा है।
दूसरी ओर, भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में डीएसपी के निलंबन और न्यायिक जांच के आदेश को सरकार की छवि बचाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर काफी हमलावर था। अब देखना दिलचस्प होगा कि आरजेडी और अन्य विपक्षी दल शिक्षा मंत्री के इन तीखे बयानों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
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