top of page

राजगीर मॉब लिंचिंग के विरोध में बिहारशरीफ में फूटा दलित समाज का आक्रोश, बुलेट पर 3 लोगों संग बिना हेलमेट पहुंचे सांसद पप्पू यादव

  • mdkashif3300
  • 1 day ago
  • 4 min read


राजगीर मॉब लिंचिंग के विरोध में बिहारशरीफ में फूटा दलित समाज का आक्रोश, बुलेट पर 3 लोगों संग बिना हेलमेट पहुंचे सांसद पप्पू यादव


बिहार के नालंदा जिले के राजगीर में पिछले दिनों दो युवकों की कथित मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या) की दर्दनाक घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस वीभत्स कांड के विरोध में और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर मंगलवार को बिहारशरीफ में दलित समाज का जबरदस्त गुस्सा फूटा। दलित समाज के विभिन्न संगठनों के बैनर तले शहर के ऐतिहासिक श्रम कल्याण मैदान से एक विशाल विरोध जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में हजारों की संख्या में युवा और नागरिक शामिल हुए। वहीं, इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पूर्णिया के निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव भी पहुंचे, लेकिन उनका आगमन और वहां से जाना शहर में भारी चर्चा और विवाद का विषय बन गया।


चर्चा में रही सांसद पप्पू यादव की 'बुलेट सवारी'

इस पूरे विरोध प्रदर्शन के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान पूर्णिया सांसद पप्पू यादव के आगमन ने खींचा। पप्पू यादव जब बिहारशरीफ पहुंचे, तो वे एक बुलेट मोटरसाइकिल पर सवार थे। सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए सांसद बुलेट पर खुद के साथ तीन अन्य लोगों (यानी कुल चार लोग) को बैठाकर बिना हेलमेट के सफर करते नजर आए। वीआईपी सुरक्षा और सांसद पद पर होने के बावजूद यातायात नियमों की इस अनदेखी को देखकर मौके पर मौजूद लोग और मीडियाकर्मी हैरान रह गए। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में सांसद की इस 'ट्रिपल से भी अधिक सवारी' और बिना हेलमेट बुलेट चलाने की वीडियो व तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं और इस पर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।


बीच रास्ते से लौटे पप्पू यादव, प्रदर्शनकारियों में नाराजगी

सांसद पप्पू यादव श्रम कल्याण मैदान पहुंचे और जुलूस में शामिल हुए। जुलूस के आगे बढ़ने पर वे कुछ दूरी तक पैदल मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों के साथ चले। लेकिन, जुलूस अभी अपने अंतिम पड़ाव समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) तक पहुंचा भी नहीं था कि पप्पू यादव अचानक बीच रास्ते से ही अपनी गाड़ी से रवाना हो गए। सांसद के इस तरह अचानक बीच प्रदर्शन से चले जाने को लेकर जुलूस में शामिल लोगों और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी असंतोष देखा गया। प्रदर्शन स्थल पर लोगों के बीच चर्चा होने लगी कि सांसद केवल फोटो खिंचवाने और राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने आए थे, और उन्हें पीड़ितों के वास्तविक संघर्ष से कोई सरोकार नहीं है।


चिराग पासवान के खिलाफ फूटा गुस्सा, तूफान राज की तीखी प्रतिक्रिया

विरोध मार्च के दौरान एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रमुख दलित नेता तूफान राज ने मंच से बेहद तीखे तेवर दिखाए। उन्होंने दलितों के नाम पर राजनीति करने वाले बड़े नेताओं पर जमकर निशाना साधा। तूफान राज ने कहा कि समाज के लोगों पर लगातार अत्याचार हो रहे हैं, उनकी हत्याएं की जा रही हैं, लेकिन कई बड़े दलित नेता आज सत्ता सुख भोग रहे हैं और इन मुद्दों पर पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं।


उन्होंने विशेष रूप से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान पर निशाना साधा। तूफान राज ने तीखे शब्दों में कहा, "हम चिराग पासवान को अपना नेता मानने से पूरी तरह इनकार करते हैं। जो नेता हमारे लोगों की मॉब लिंचिंग पर चुप रहे, वह हमारा प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता।" उन्होंने आक्रोश भरे शब्दों में चेतावनी दी कि अब समाज के शोषित और वंचित लोग चुप नहीं बैठेंगे और अपने हक व न्याय की लड़ाई खुद लड़ेंगे।


पुलिस से भिड़े प्रदर्शनकारी, बैरिकेडिंग पर तीखी नोकझोंक

श्रम कल्याण मैदान से शुरू हुआ यह विशाल विरोध मार्च जैसे ही समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) की ओर बढ़ा, वहां पहले से ही मुस्तैद भारी पुलिस बल ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत बैरिकेडिंग कर जुलूस को रोक दिया। प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट के अंदर जाकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपना चाहते थे। पुलिस द्वारा रोके जाने पर प्रदर्शनकारी उग्र हो गए और बैरिकेडिंग को लांघने का प्रयास करने लगे। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी देर तक तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। हालांकि, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की सूझबूझ और हस्तक्षेप के बाद स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया और प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों का पत्र प्रशासन को सौंपा।


सम्राट चौधरी और चिराग पासवान के खिलाफ जमकर नारेबाजी

प्रदर्शन में शामिल आक्रोशित लोगों ने बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है और अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने राजगीर मॉब लिंचिंग की घटना में स्पीडी ट्रायल (त्वरित सुनवाई) कराकर पीड़ित परिवारों को शीघ्र न्याय देने, दोषियों को फांसी की सजा देने और पीड़ित परिवारों के एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी व उचित मुआवजा देने की मांग की।


प्रशासन की पैनी नजर, राजनीतिक माहौल गरमाया

इस विशाल विरोध मार्च के बाद बिहारशरीफ और आसपास के इलाकों में राजनीतिक और सामाजिक हलचल काफी तेज हो गई है। दलित संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द ही दोषियों को सजा नहीं मिली और पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिला, तो पूरे सूबे में उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा। सुरक्षा के लिहाज से स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीमें संवेदनशील स्थानों पर लगातार गश्त कर रही हैं और सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्टों को लेकर अलर्ट मोड पर हैं।

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page