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बहादुरगंज: कुढ़ेली चौक-झीगाकाटा सड़क पर 1 साल से अधूरा पड़ा है बलुआडांगी पुल का डायवर्सन, ठेकेदार फरार, राहगीर बेहाल

  • mdkashif3300
  • 9 hours ago
  • 3 min read



बहादुरगंज: कुढ़ेली चौक-झीगाकाटा सड़क पर 1 साल से अधूरा पड़ा है बलुआडांगी पुल का डायवर्सन, ठेकेदार फरार, राहगीर बेहाल


एक तरफ सरकार ग्रामीण इलाकों में सड़कों और पुल-पुलियों का जाल बिछाकर चहुंमुखी विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर लचर व्यवस्था और संवेदकों (ठेकेदारों) की मनमानी के कारण योजनाएं आम जनता के लिए मुसीबत का सबब बन रही हैं। ऐसा ही एक गंभीर मामला किशनगंज जिले के बहादुरगंज विधानसभा क्षेत्र से सामने आया है। यहाँ कुढ़ेली चौक से झीगाकाटा हाट को जोड़ने वाली मुख्यमंत्री सड़क पर निर्माण कार्य की कछुआ चाल ने हजारों ग्रामीणों की जिंदगी को नर्क बना दिया है। बलुआडांगी गांव के पास निर्माणाधीन आरसीसी (RCC) पुल के बगल में बनाया जा रहा डायवर्सन पिछले एक साल से अधूरा पड़ा है। विडंबना यह है कि जिम्मेदार ग्रामीण कार्य विभाग और निर्माण एजेंसी दोनों ही गहरी नींद में सोए हुए हैं।


हजारों ग्रामीणों की लाइफलाइन है यह 10 किलोमीटर लंबी सड़क

कुढ़ेली चौक से झीगाकाटा हाट को जोड़ने वाली यह सड़क लगभग 10 किलोमीटर लंबी है, जो इस क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लिए लाइफलाइन मानी जाती है। इसी मुख्य मार्ग से होकर बलुआडांगी, झीगाकाटा, कुढ़ेली समेत कई गांवों के लोग अस्पताल, स्कूल, हाट-बाजार, ब्लॉक मुख्यालय और जिला मुख्यालय किशनगंज तक का सफर तय करते हैं। लेकिन विकास के नाम पर शुरू किया गया यह सड़क और पुल निर्माण कार्य अब स्थानीय लोगों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत का दूसरा नाम बन चुका है। अधूरे पड़े डायवर्सन के कारण लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है।


संवेदक काम छोड़कर फरार, विभाग बना मूकदर्शक

सड़क निर्माण का काम हाथ में लेने वाली निर्माण एजेंसी और उसका ठेकेदार (संवेदक) काम को बीच में ही अधूरा छोड़कर मौके से फरार बताया जा रहा है। एक साल का लंबा समय बीत जाने के बावजूद न तो पुल का काम पूरा हुआ और न ही आवागमन के लिए सुरक्षित डायवर्सन बनाया जा सका। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब संवेदक काम छोड़कर भाग गया, तो संबंधित विभाग इतने दिनों से क्या कर रहा था? यदि विभाग ने संवेदक पर कोई कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई की भी है, तो वैकल्पिक व्यवस्था कर निर्माण कार्य को दोबारा क्यों नहीं शुरू कराया गया? इस लचर कार्यप्रणाली का खामियाजा गरीब ग्रामीण भुगत रहे हैं।


पूर्व विधायक अंजार नईमी ने जताई चिंता

मामले को लेकर बहादुरगंज के पूर्व विधायक अंजार नईमी ने बताया कि निर्माण कार्य में लापरवाही बरतने वाले संवेदक के खिलाफ विभाग द्वारा कार्रवाई की जा चुकी है और वर्तमान में वह काम छोड़कर फरार है। उन्होंने कहा, "क्षेत्र की जनता इस अधूरे निर्माण के कारण बेहद परेशान है। मैंने स्वयं कई बार विभागीय अधिकारियों से मुलाकात कर इस सड़क और डायवर्सन को जल्द से जल्द पूरा कराने की मांग की है। लेकिन अब तक विभाग की ओर से कोई ठोस और त्वरित कदम नहीं उठाया गया है, जिससे लोगों को राहत मिल सके।"


बरसात शुरू होते ही 'सड़क' बनी 'दलदल'

हाल ही में हुई मानसूनी बारिश के बाद सड़क और अधूरे डायवर्सन की स्थिति बेहद भयावह हो गई है। बलुआडांगी गांव के समीप सड़क पूरी तरह से कीचड़ और दलदल में तब्दील हो चुकी है। ग्रामीणों को मजबूरन खेतों के रास्ते या कीचड़ और जलजमाव वाले वैकल्पिक मार्गों से जान जोखिम में डालकर गुजरना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को हो रही है। बारिश के दिनों में यदि कोई आपातकालीन चिकित्सा स्थिति उत्पन्न हो जाए, तो एम्बुलेंस का गांव तक पहुंचना भी नामुमकिन हो जाता है। लोगों को कई किलोमीटर का अतिरिक्त लंबा चक्कर लगाकर गंतव्य तक जाना पड़ रहा है।


सूचना पट्ट गायब, पारदर्शिता पर गंभीर सवाल

नियमों के अनुसार, सरकारी फंड से चलने वाली किसी भी विकास योजना के निर्माण स्थल पर एक विस्तृत सूचना पट्ट (इनफॉर्मेशन बोर्ड) लगाया जाना अनिवार्य है। इस बोर्ड पर योजना का नाम, कुल स्वीकृत लागत, निर्माण एजेंसी का नाम, कार्य शुरू होने की तारीख और कार्य पूरा होने की अंतिम समय सीमा दर्ज होनी चाहिए। लेकिन बलुआडांगी पुल निर्माण स्थल पर ऐसा कोई बोर्ड दूर-दूर तक दिखाई नहीं देता। ग्रामीणों का आरोप है कि जानबूझकर योजना की लागत और विवरण को छुपाया जा रहा है ताकि भ्रष्टाचार और लेटलतीफी पर जनता सवाल न उठा सके।


कब तक इंतजार करेगी बहादुरगंज की जनता?

ग्रामीणों का कहना है कि कागजों पर करोड़ों की योजनाएं चलती हैं और उनका प्रचार-प्रसार होता है, लेकिन जमीनी स्तर पर वे आज भी कीचड़ और बदहाल रास्तों से गुजरने को मजबूर हैं। क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन और ग्रामीण कार्य विभाग के आला अधिकारियों से मांग की है कि फरार संवेदक का ठेका रद्द कर किसी नई एजेंसी को काम सौंपा जाए और जनहित में बलुआडांगी पुल व डायवर्सन का निर्माण अविलंब पूरा किया जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब तक एक्शन लेता है।

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