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ठाकुरगंज में 'ई-शिक्षाकोष' पोर्टल को लेकर डिजिटल आपातकाल: 239 स्कूलों के 46% शिक्षकों का डेटा अब भी पेंडिंग; BEO ने जारी किया पत्र संख्या 517

mdkashif3300
Jun 20
3 min read


बिहार के सरकारी स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया शिक्षा विभाग का ‘ई-शिक्षाकोष पोर्टल’ (E-Shikshakosh Portal) अब शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड में इस डिजिटल सिस्टम में भारी लापरवाही सामने आने के बाद विभाग ने बेहद कड़ा और अनुशासनात्मक रुख अपना लिया है। प्रखंड के सरकारी स्कूलों में वर्तमान स्थिति “नो एंट्री विदाउट डेटा” (बिना प्रोफाइल डेटा के पोर्टल में प्रवेश नहीं) जैसी हो गई है।


★ 239 स्कूलों में 46% शिक्षकों का डेटा अब भी पेंडिंग

ठाकुरगंज प्रखंड के कुल 239 प्राथमिक, मध्य और उच्च विद्यालयों से प्राप्त रिपोर्ट ने विभाग को चौंका दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, प्रखंड के केवल 54 प्रतिशत शिक्षकों ने ही अब तक अपनी डिजिटल प्रोफाइल पोर्टल पर सफलतापूर्वक अपडेट की है। इसका सीधा मतलब यह है कि लगभग 46 प्रतिशत शिक्षकों की सेवा पुस्तिका, प्रमाण पत्र और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तिगत डेटा अभी भी पोर्टल की “पेंडिंग” (Pending) फाइल में दबे पड़े हैं। इस लचर रवैये से पूरा शिक्षा विभाग आधा डिजिटल और आधा कागजी युग में फंसा हुआ नजर आ रहा है।


★ बीईओ ने जारी किया आधिकारिक पत्र संख्या 517

डेटा अपडेशन में हो रही देरी को लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनके कड़े निर्देश पर ठाकुरगंज के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रखंड के सभी विद्यालयों के लिए पत्र संख्या 517 जारी कर दिया है। इस पत्र के माध्यम से सभी स्कूलों को कड़ा अल्टीमेटम दिया गया है कि वे अविलंब अपने स्टाफ की प्रोफाइल अपडेट करें। इस आदेश के सामने आते ही प्रखंड के स्कूलों में अचानक “डिजिटल आपातकाल” जैसी हलचल देखी जा रही है।


★ प्रधानाध्यापकों की तय की गई सीधी जिम्मेदारी

इस बार शिक्षा विभाग ने नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए जिम्मेदारी तय करने का खेल ही बदल दिया है। पहले डेटा अपडेट न होने का ठीकरा केवल संबंधित शिक्षक पर फोड़ा जाता था, लेकिन अब विभाग ने स्कूल के प्रधानाध्यापक (HM) और प्रभारी प्रधान शिक्षकों को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है। नए आदेश के अनुसार, यदि किसी स्कूल के एक भी शिक्षक या शिक्षिका की प्रोफाइल अधूरी पाई जाती है, तो उसकी पूरी जवाबदेही स्कूल प्रशासन की होगी और विभागीय गाज सीधे प्रधानाध्यापक पर गिरेगी।


★ शनिवार सुबह से स्कूलों में मची आपाधापी

बीईओ के पत्र संख्या 517 के जारी होने के बाद, शनिवार सुबह से ही प्रखंड के कई स्कूलों में नजारा किसी परीक्षा केंद्र जैसा नजर आया। स्कूल खुलने के साथ ही शिक्षक और प्रधानाध्यापक अध्यापन कार्य के अलावा अपने शैक्षणिक दस्तावेज, नियुक्ति पत्र, सेवा संपुष्टि विवरण और अन्य प्रमाण पत्र खोजने में लगे रहे। कई स्कूलों में तकनीकी दिक्कतों के कारण लॉगिन पासवर्ड रीसेट करने और ओटीपी (OTP) की समस्याओं से निपटने के लिए शिक्षकों की तकनीकी टीम सक्रिय दिखी।


★ स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

ठाकुरगंज के स्थानीय जागरूक नागरिकों और शिक्षाविदों का कहना है कि स्कूलों को डिजिटल करना और शिक्षकों का ऑनलाइन रिकॉर्ड रखना एक बेहद जरूरी कदम है। इससे पारदर्शिता आएगी और फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी, लेकिन अधिकारियों को पोर्टल की तकनीकी खामियों और इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्याओं को भी ध्यान में रखना चाहिए। अचानक की गई इस सख्ती से शिक्षक मानसिक तनाव में आ गए हैं, जिससे शिक्षण कार्य भी प्रभावित हो रहा है। फिलहाल, ठाकुरगंज प्रखंड में शत-प्रतिशत डिजिटल प्रोफाइल पूरा करने का अभियान जोरों पर है।

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