Operation Farjiwada : नेपाली नागरिक बनी सरकारी शिक्षिका, सिस्टम की खुली पोल

Operation Farjiwada
बिहार के सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज से सामने आया यह सनसनीखेज मामला प्रशासनिक व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आरोप है कि नेपाल की नागरिक संगीता कुमारी ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे पहले बिहार में सरकारी शिक्षिका की नौकरी हासिल की और बाद में बिना भारतीय नागरिकता प्राप्त किए त्रिवेणीगंज नगर परिषद की चेयरमैन बन गईं।
जानकारी के अनुसार, संगीता कुमारी मूल रूप से नेपाल के सप्तरी जिले की निवासी हैं। विवाह के बाद उन्होंने कथित रूप से मधुबनी जिले की एक महिला के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों का उपयोग करते हुए वर्ष 2014 में प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका के रूप में नियुक्ति पाई। इस पद पर वे करीब 7 वर्ष 4 महीने तक कार्यरत रहीं।
आरोप है कि इस दौरान उन्होंने अपने पति को ही पिता दर्शाकर जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र समेत अन्य आवश्यक दस्तावेज बनवाए, जिसके आधार पर न सिर्फ सरकारी नौकरी बल्कि बाद में चुनावी प्रक्रिया में भी भाग लिया गया।
मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब विशेष गहन पुनरीक्षण 2025 के दौरान भारतीय नागरिकता प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं करने के कारण संगीता कुमारी का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया, इसके बावजूद वे अब भी नगर परिषद चेयरमैन पद पर बनी हुई हैं।
पूरे मामले का खुलासा भ्रष्टाचार मुक्त जागरूकता अभियान के संयोजक एवं आरटीआई कार्यकर्ता अनिल कुमार सिंह ने किया है। उन्होंने इस प्रकरण को सिस्टम में गहराई तक फैले फर्जीवाड़े का उदाहरण बताते हुए चुनाव आयोग और जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच एवं सख्त कार्रवाई की मांग की है।
उनका कहना है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे यह स्पष्ट होता है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे कैसे सरकारी नौकरी और संवैधानिक पदों तक पहुंच बनाई जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए बेहद गंभीर खतरा है।
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