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कटिहार में महानंदा नदी का कहर: ₹57 लाख का रिंग बांध पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त, बारसोई SDO के निर्देश पर जांच शुरू

  • mdkashif3300
  • 1 day ago
  • 3 min read


कटिहार में महानंदा नदी का कहर: ₹57 लाख का रिंग बांध पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त, बारसोई SDO के निर्देश पर जांच शुरू


बिहार के सीमांचल क्षेत्र में मानसून के दस्तक देते ही नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव शुरू हो गया है। इसी के साथ बाढ़ और नदी कटाव का खतरा भी सीमावर्ती इलाकों पर मंडराने लगा है। कटिहार जिले के आजमनगर प्रखंड में बहने वाली महानंदा नदी का बढ़ता जलस्तर अब स्थानीय रिंग बांध के लिए खतरे की घंटी बन गया है। इस बीच, लगभग 57 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से कराए गए कटावरोधी (एंटी इरोजन) कार्य के पहली ही मानसूनी बारिश में क्षतिग्रस्त हो जाने से विभाग की कार्यप्रणाली और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं। मामले के सुर्खियों में आते ही प्रशासनिक महकमा हरकत में आया और जांच शुरू कर दी गई है।


एसडीओ के निर्देश पर अधिकारियों की टीम ने किया मुआयना

महानंदा नदी के रिंग बांध के क्षतिग्रस्त होने की खबर जैसे ही सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में आई, बारसोई के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) राजू कुमार ने इसे बेहद गंभीरता से लिया। उनके निर्देश पर अनुमंडल राजस्व अधिकारी विकास कुमार तुरंत आजमनगर पहुंचे। उन्होंने आजमनगर के अंचल अधिकारी (CO) मोहम्मद रिजवान आलम और महानंदा बेसिन विभाग के कनिष्ठ अभियंता (जूनियर इंजीनियर) राहुल कुमार के साथ प्रभावित स्थल का सघन निरीक्षण किया। अधिकारियों ने रिंग बांध के टूटे हुए हिस्से, कटाव की वर्तमान स्थिति और एंटी-इरोजन के तहत बिछाए गए जियो बैग की गुणवत्ता की गहन जांच की।


15 मीटर लंबी जियो बैग संरचना नदी में विलीन

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से महानंदा नदी के जलस्तर में हो रहे तीव्र उतार-चढ़ाव के कारण आजमनगर प्रखंड में बने सुरक्षा रिंग बांध के डाउन स्ट्रीम (निचले प्रवाह) वाले हिस्से में भारी दबाव बना। इसके परिणामस्वरूप, हाल ही में ₹57 लाख की लागत से बनाई गई जियो बैग की एंटी-इरोजन सुरक्षा दीवार लगभग 15 मीटर की लंबाई में ढहकर नदी में विलीन हो गई।


स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ से पहले जब काम चल रहा था, तब संवेदक (ठेकेदार) द्वारा मानकों की भारी अनदेखी की गई थी। निर्माण में घटिया बालू और कमजोर जियो बैग्स का इस्तेमाल किया गया था, जिसके कारण यह सुरक्षा कार्य पहली मानसूनी बारिश और नदी के सामान्य बहाव को भी झेलने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ।


वरीय अधिकारियों को भेजी जाएगी रिपोर्ट: विकास कुमार

निरीक्षण के बाद अनुमंडल राजस्व अधिकारी विकास कुमार ने संवाददाताओं को बताया, "नदी कटाव और रिंग बांध के क्षतिग्रस्त होने की खबर समाचार माध्यमों में प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। आज की गई जांच में यह पाया गया है कि लगभग 15 मीटर के दायरे में कटावरोधी कार्य को नुकसान पहुंचा है। हमने निर्माण से जुड़े दस्तावेजों और वर्तमान स्थिति का आकलन किया है। एक विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर बारसोई एसडीओ और कटिहार जिला अधिकारी को भेजी जा रही है, ताकि निर्माण की गुणवत्ता की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जा सके।"


सुरक्षा को लेकर विभाग ने शुरू की 'फ्लड फाइटिंग'

रिंग बांध के पूरी तरह टूटने की स्थिति में आजमनगर प्रखंड के दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी घुसने और तबाही मचने की आशंका है। इस संभावित खतरे और रिंग बांध को और अधिक नुकसान से बचाने के लिए महानंदा बेसिन विभाग ने युद्ध स्तर पर 'फ्लड फाइटिंग' (बाढ़ नियंत्रण कार्य) शुरू कर दिया है। विभाग के इंजीनियरों की देखरेख में मजदूर प्रभावित हिस्से में बड़े पैमाने पर नायलॉन क्रेट (NC) बैग्स और जियो बैग्स डालकर कटाव को रोकने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि बांध को सुरक्षित रखा जा सके।


निरीक्षण के दौरान जनप्रतिनिधि और ग्रामीण रहे उपस्थित

अधिकारियों के इस औचक निरीक्षण के दौरान जनता की आवाज उठाने के लिए कई स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौके पर मौजूद थे। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रखंड अध्यक्ष सुनील सिन्हा, पंचायत समिति सदस्य राकेश कुमार पोद्दार, वरिष्ठ समाजसेवी कुंवर ठाकुर, सुबोध यादव सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों ने अधिकारियों के समक्ष अपनी चिंताएं रखीं। जनप्रतिनिधियों ने मांग की कि बाढ़ सुरक्षा कार्यों में भ्रष्टाचार करने वाले अभियंताओं और संवेदकों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि यह केवल पैसों की बर्बादी नहीं, बल्कि हजारों ग्रामीणों के जीवन की सुरक्षा से जुड़ा बेहद संवेदनशील मामला है।

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