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टेढ़ागाछ में गोरियाधर रेलवे पुल का डायवर्सन ध्वस्त: आधा दर्जन गांवों का संपर्क टूटा, 12 किमी अतिरिक्त चक्कर लगाने को मजबूर लोग

  • mdkashif3300
  • 22 hours ago
  • 3 min read

टेढ़ागाछ में गोरियाधर रेलवे पुल का डायवर्सन ध्वस्त: आधा दर्जन गांवों का संपर्क टूटा, 12 किमी अतिरिक्त चक्कर लगाने को मजबूर लोग


बिहार के सीमांचल क्षेत्र में मानसूनी बारिश की शुरुआत होते ही ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचे की पोल खुलने लगी है। किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड में एक महत्वपूर्ण सड़क संपर्क डायवर्सन के अचानक ध्वस्त हो जाने से हजारों लोगों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। स्थानीय रेलवे पुल के नीचे बनाया गया यह डायवर्सन पहली तेज बारिश के बाद नदी के तेज बहाव में बह गया। इस मार्ग के टूटने के कारण क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक गांवों का प्रखंड मुख्यालय टेढ़ागाछ से सीधा संपर्क लगभग पूरी तरह से कट गया है। अब लोगों को रोजमर्रा की आवश्यकताओं और आपातकालीन कार्यों के लिए करीब 12 किलोमीटर का अतिरिक्त लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है।


गोरियाधर रेलवे पुल के समीप हुआ हादसा

हादसे का यह मामला किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड अंतर्गत कालपीर पंचायत के पीपरा गांव के पास का है। यहाँ गोरियाधर रेलवे पुल के समीप रेलवे ट्रैक और स्थानीय सड़क संपर्क को बनाए रखने के लिए एक अस्थायी डायवर्सन का निर्माण किया गया था। हाल ही में पहाड़ों और स्थानीय जलधाराओं से आए पानी के तेज बहाव के कारण यह डायवर्सन भारी दबाव नहीं झेल सका और बीच से टूटकर बह गया। डायवर्सन के बहते ही पीपरा और आसपास के क्षेत्रों में आवागमन पूरी तरह ठप हो गया।


आधा दर्जन से अधिक गांवों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क कटा

इस मुख्य डायवर्सन के ध्वस्त होने का सबसे बड़ा असर स्थानीय ग्रामीण कनेक्टिविटी पर पड़ा है। इसके कारण बीबीगंज पूरा पंचायत सहित पीपरा, बैसाटोली, गर्राटोली, काशीबारी, हाटगांव और आसपास के कई छोटे टोलों का सीधा संपर्क प्रखंड मुख्यालय टेढ़ागाछ से टूट गया है। इन गांवों के लोगों को पहले जहाँ टेढ़ागाछ पहुंचने में केवल 15 से 20 मिनट का समय लगता था, वहीं अब उन्हें 12 किलोमीटर अतिरिक्त घूमकर जाना पड़ रहा है, जिससे समय और पेट्रोल दोनों का भारी नुकसान हो रहा है।


मरीजों, छात्रों और किसानों की बढ़ी परेशानी

मानसून के इस मौसम में रास्ता बंद हो जाने से सबसे अधिक परेशानी स्थानीय स्कूली बच्चों, कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों और मरीजों को हो रही है। यदि गांव में कोई अचानक बीमार पड़ जाए या प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला हो, तो एम्बुलेंस का गांव तक पहुंचना नामुमकिन हो गया है। मरीजों को खाट या पालकी के सहारे मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ रहा है।


इसके अतिरिक्त, यह कृषि प्रधान इलाका है जहाँ किसान हरी सब्जियां, जूट और मक्का उगाते हैं। खेतों से अपनी उपज को स्थानीय हाट-बाजारों तक पहुंचाने के लिए किसानों को अब अधिक भाड़ा देना पड़ रहा है, जिससे उनकी आय प्रभावित हो रही है।


वार्षिक डायवर्सन नीति से तंग आ चुके हैं ग्रामीण

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन हर साल यहाँ मिट्टी और ह्यूम पाइप डालकर एक कामचलाऊ डायवर्सन बना देता है, जो पहली ही तेज बारिश में पानी के साथ बह जाता है। जनता के टैक्स के पैसों की इस बर्बादी से तंग आकर अब ग्रामीण एक स्थायी वैकल्पिक पुल या पक्के कंक्रीट मार्ग की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने के बाद भी सिर्फ अस्थायी लीपापोती कर दी जाती है, जिससे बरसात के चार महीने उन्हें नरकीय जीवन जीने के लिए मजबूर होना पड़ता है।


प्रशासन को दी आंदोलन की चेतावनी

समस्या का कोई त्वरित समाधान न होते देख पीपरा और बीबीगंज पूरा पंचायत के आक्रोशित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और ग्रामीण कार्य विभाग के खिलाफ गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने किशनगंज के जिलाधिकारी (DM) और टेढ़ागाछ के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) से मांग की है कि प्राथमिकता के आधार पर अविलंब यहाँ एक मजबूत डायवर्सन या स्थायी बेली ब्रिज (लोहे का अस्थायी पुल) का निर्माण कराया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले एक सप्ताह के भीतर निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे प्रखंड कार्यालय के समक्ष लोकतांत्रिक तरीके से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।

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