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कटिहार की बेटी राजकुमारी ने BPSC में लहराया परचम: मिली 824वीं रैंक, बनीं कार्यपालक पदाधिकारी, पूर्व मंत्री राम प्रकाश महतो ने दी बधाई

  • mdkashif3300
  • 14 hours ago
  • 3 min read

कटिहार की बेटी राजकुमारी ने BPSC में लहराया परचम: मिली 824वीं रैंक, बनीं कार्यपालक पदाधिकारी, पूर्व मंत्री राम प्रकाश महतो ने दी बधाई


सीमांचल के कटिहार जिले की बेटियों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यदि इरादे मजबूत हों और मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो कोई भी मंजिल पाना असंभव नहीं है। कटिहार शहर के लोहिया नगर की रहने वाली राजकुमारी ने अपनी कड़ी मेहनत, अटूट लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। राजकुमारी ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में राज्य स्तर पर 824वीं रैंक प्राप्त की है। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के साथ ही उनका चयन पंचायती राज विभाग के अंतर्गत कार्यपालक पदाधिकारी (Executive Officer) के पद पर हुआ है। उनकी इस सफलता से न केवल उनके परिवार में बल्कि पूरे कटिहार जिले में खुशी और गर्व का माहौल है।


साधारण परिवार और संसाधनों की कमी नहीं बनी बाधा

राजकुमारी एक बेहद साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता वीरेंद्र सिंह रेलवे विभाग से सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) कर्मचारी हैं और उन्होंने अपने सीमित आय स्रोतों के बावजूद बच्चों की शिक्षा में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी। राजकुमारी की सफलता की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि उन्होंने किसी बड़े महानगर (जैसे पटना या दिल्ली) के महंगे कोचिंग संस्थानों का सहारा नहीं लिया। उन्होंने घर पर ही रहकर, इंटरनेट और किताबों की मदद से खुद का टाइम टेबल बनाया और कड़ी 'सेल्फ-स्टडी' (स्व-अध्ययन) के माध्यम से परीक्षा की तैयारी की।


असफलता से नहीं हारीं हिम्मत, तीसरे प्रयास में मिली सफलता

BPSC जैसी कठिन सिविल सेवा परीक्षा का सफर राजकुमारी के लिए आसान नहीं था। शुरुआती दो प्रयासों में उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा। परीक्षा पास न होने पर वे निराश तो हुईं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अपनी कमियों को पहचानकर उन्होंने उन पर और अधिक मेहनत की। अंततः, अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने सफलता का परचम लहरा ही दिया।


अपनी सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए राजकुमारी ने कहा, "लगातार मेहनत, धैर्य और खुद पर विश्वास (आत्मविश्वास) ने ही मुझे इस मुकाम तक पहुंचाया है। जब आप असफल होते हैं, तो वह आपकी हार नहीं बल्कि सीखने का एक अवसर होता है।" उन्होंने अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने पिता वीरेंद्र सिंह, माता के निरंतर प्रोत्साहन, शिक्षकों के मार्गदर्शन और दोस्तों के सहयोग को दिया।


पूर्व मंत्री राम प्रकाश महतो ने घर जाकर किया सम्मानित

राजकुमारी की इस ऐतिहासिक सफलता की खबर जैसे ही शहर में फैली, बधाई देने वालों का तांता लग गया। बिहार सरकार के पूर्व मंत्री डॉ. राम प्रकाश महतो अपनी पूरी टीम के साथ लोहिया नगर स्थित राजकुमारी के आवास पर पहुंचे। उन्होंने राजकुमारी को मिठाई खिलाई, फूलों का गुलदस्ता भेंट किया और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।


इस अवसर पर पूर्व मंत्री राम प्रकाश महतो ने कहा, "राजकुमारी ने आज जो मुकाम हासिल किया है, वह उन तमाम छात्र-छात्राओं के लिए एक खुली प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं। राजकुमारी ने साबित कर दिया है कि सफलता महंगे कोचिंगों की मोहताज नहीं होती, बल्कि इसके लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और सच्ची लगन की आवश्यकता होती है। यह उपलब्धि केवल उनके परिवार की नहीं, बल्कि पूरे कटिहार और सीमांचल के लिए गर्व का विषय है।"


सीमांचल की बेटियों के लिए बनीं रोल मॉडल

शिक्षा और विकास के मामले में पिछड़े माने जाने वाले सीमांचल क्षेत्र से बेटियों का प्रशासनिक सेवाओं में आना एक बेहद सुखद संकेत है। स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि राजकुमारी जैसी बेटियों की सफलता से क्षेत्र की अन्य लड़कियों और उनके अभिभावकों का हौसला बढ़ेगा। अब माता-पिता अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा और सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए प्रेरित करेंगे। राजकुमारी अब जल्द ही प्रशिक्षण पूरा कर कार्यपालक पदाधिकारी के रूप में बिहार के विकास और पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने में अपना योगदान देंगी।

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