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पूर्णिया में भाजपा का 'संविधान हत्या दिवस': टाउन हॉल पहुंचे केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे, आपातकाल को बताया काला अध्याय

mdkashif3300
Jun 25
3 min read


पूर्णिया में भाजपा का 'संविधान हत्या दिवस': टाउन हॉल पहुंचे केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे, आपातकाल को बताया काला अध्याय


25 जून 1975 को देश में लगाए गए आपातकाल की 51वीं बरसी पर गुरुवार को पूर्णिया के ऐतिहासिक टाउन हॉल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जिला इकाई द्वारा ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से भाजपा ने 1975 के दौर के दमन और लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन को याद करते हुए कांग्रेस पार्टी पर जमकर निशाना साधा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारत सरकार के केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे उपस्थित रहे। उनके साथ पूर्णिया सदर के भाजपा विधायक विजय खेमका, विधान पार्षद (MLC) अनिल ठाकुर समेत सीमांचल क्षेत्र के कई वरिष्ठ भाजपा नेता, पदाधिकारी और सैकड़ों समर्पित कार्यकर्ता उपस्थित थे।


लोकतंत्र के इतिहास का अविस्मरणीय और दुखद दिन

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि 25 जून 1975 का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक ऐसा काला दिन है, जिसे चाहकर भी कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, "आज ही के दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने अपनी सत्ता बचाने के लिए पूरे देश को जेलखाना बना दिया था। आपातकाल लागू कर न केवल नागरिकों के मौलिक अधिकारों को छीना गया, बल्कि बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर द्वारा रचित भारत के महान संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को पैरों तले कुचलने का काम किया गया था।"


अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगा था क्रूर प्रतिबंध

केंद्रीय मंत्री ने आपातकाल के दौरान देश के बिगड़े हालातों का जिक्र करते हुए कहा कि उस काले दौर में सरकार के खिलाफ उठने वाली हर आवाज को बेरहमी से कुचल दिया गया था। उन्होंने कहा, "आपातकाल लगते ही देश के तमाम प्रमुख विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और न्याय की बात करने वाले पत्रकारों को बिना किसी वारंट और मुकदमे के जेलों में ठूंस दिया गया था। प्रेस की आजादी पर सख्त सेंसरशिप लागू कर दी गई थी, जिससे सरकार विरोधी खबरें जनता तक न पहुंच सकें।" उन्होंने आगे कहा कि उस दौरान लोगों के बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर जो प्रतिबंध लगाए गए थे, उसने लोकतंत्र की मूल आत्मा को हिलाकर रख दिया था।


क्यों मनाया जा रहा है 'संविधान हत्या दिवस'?

सतीश चंद्र दुबे ने बताया कि केंद्र सरकार और भाजपा ने 25 जून को हर साल राष्ट्रीय स्तर पर ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इसका मुख्य उद्देश्य देश की युवा पीढ़ी को यह याद दिलाना है कि हमारे पूर्वजों और नेताओं ने किस प्रकार कड़े संघर्ष और यातनाओं को सहकर लोकतंत्र को दोबारा बहाल कराया था। उन्होंने कहा, "यह दिन हमें यह सीख देता है कि हमें हमेशा संविधान की रक्षा के लिए तत्पर रहना चाहिए और किसी भी राजनीतिक दल या परिवार को देश के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।"


विधायक विजय खेमका और एमएलसी अनिल ठाकुर के तीखे वार

पूर्णिया सदर के लोकप्रिय विधायक विजय खेमका ने भी अपने संबोधन में कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि आज जो लोग हाथ में संविधान की प्रति लेकर नाटक कर रहे हैं, उनके पूर्वजों ने ही इस संविधान की आत्मा की हत्या की थी। आपातकाल के समय जेलों में बंद रहे मीसा सेनानियों के त्याग को याद करते हुए विधायक ने उन्हें नमन किया। विधान पार्षद अनिल ठाकुर ने कहा कि आपातकाल भारतीय राजनीति का सबसे स्याह अध्याय है और भाजपा हर नागरिक को संविधान के महत्व के प्रति जागरूक करने के लिए कटिबद्ध है।


संविधान की रक्षा और लोकतंत्र की मजबूती का लिया संकल्प

कार्यक्रम के अंत में टाउन हॉल में मौजूद सभी भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को अक्षुण्ण बनाए रखने और संविधान की मर्यादा की रक्षा करने का सामूहिक संकल्प लिया। नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का संविधान पूरी तरह सुरक्षित है और विकास के पथ पर अग्रसर है। इस कार्यक्रम के दौरान आपातकाल के संघर्षों पर आधारित एक डाक्यूमेंट्री फिल्म भी दिखाई गई, जिसे देखकर उपस्थित कार्यकर्ता भावुक और प्रेरित हुए।

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