हसीन निगाहें
- MOBASSHIR AHMAD

- Dec 1, 2024
- 1 min read

हसीन निगाहें से लूटकर मस्तानी चली
मैं ठहरा रहा! नैनो से बातें होती गयी
मैंने देखा, उसने देखा, आँखे भर आयी !
उसकी नैनो से फिसल चला मैं, वो चली !!
आसरा जगी दिल में, गुंज उठी सहनायी
निंदिया में, उससे जुड़ा मैं, ख्वाबे भर आयी
मैंने भी ली अँगड़ायी! दिल कयामत सायी !
ख्वाबों में, चाँद मुझसे मिलने को आयी !!
तेरे निगाहे ! ख्वाबों में मेरे आलोक जगायी
ख्यालों में, जज्बातों में, तुम जी भरकर आयी
चल चला मैं, मिलने को मन विभोर छायी !
ख़्वाबों की प्रासाद में, जीवंतता ले आयी !!
रंगमंच सजी, होगी विदायी या हो जुदायी
जीवन में खुशबू और सु मुस्कान आयी
इश्क की बवंडर में, इश्क कयामत लायी !
ख्वाबों में, चाँद मुझसे मिलने को आयी !!
निगाहें से जतलायी, बेइंतहा तन्हाई ले गयी
मुझे बसाये रखा दिल में, मुझमें मिल गयी
खुशबू रचा में तुझमे, तुम सु मुस्कान लायी !
मेरे जीवन को आकर्षक और मधुर बनायी !!
- सौरभ कुमार, जामताड़ा (झारखण्ड)

_edited.jpg)







Comments