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बिहार का 'रेन कैपिटल' बना गलगलिया: किशनगंज में टूटे बारिश के सारे रिकॉर्ड, गलगलिया में 110.8 मिमी मूसलाधार बारिश; धान रोपनी ने पकड़ी रफ्तार

  • mdkashif3300
  • 7 hours ago
  • 3 min read

बिहार में मानसून के प्रवेश के साथ ही मौसम का एक अनोखा और विरोधाभासी रूप देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहाँ सूबे के अधिकांश जिले भीषण गर्मी, लू और उमस की दोहरी मार झेल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सीमांचल के किशनगंज जिले में बादलों ने जमकर मेहरबानी दिखाई है। पिछले 24 घंटों के दौरान सीमांचल में हुई मूसलाधार बारिश ने नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित किशनगंज जिले के गलगलिया कस्बे को इस मूसलाधार बारिश ने पूरे बिहार का 'रेन कैपिटल' (वर्षा राजधानी) बना दिया है।


★ गलगलिया में सामान्य से 283 फीसदी अधिक बारिश

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), पटना द्वारा जारी किए गए ताजा बुलेटिन के अनुसार, पिछले 24 घंटों में गलगलिया में रिकॉर्ड 110.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यह आंकड़ा इस समय होने वाली सामान्य बारिश से लगभग 283 प्रतिशत अधिक है। भारी बारिश के चलते गलगलिया और उसके आसपास के इलाकों में मौसम पूरी तरह सुहावना हो गया है और लोगों को उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिली है।


★ ठाकुरगंज और तैयबपुर में भी जमकर बरसे बदरा

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, किशनगंज जिले के लगभग सभी प्रखंडों में मूसलाधार से मध्यम स्तर की बारिश दर्ज की गई है:

- गलगलिया: 110.8 मिमी

- ठाकुरगंज: 72.4 मिमी

- तैयबपुर: 64.6 मिमी

- चरघरिया: 55.6 मिमी

- कोचाधामन: 45.2 मिमी

- किशनगंज शहर: 38.4 मिमी


इस तेज बारिश के कारण स्थानीय नदियों, नहरों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि यह बारिश विनाशकारी बाढ़ के रूप में नहीं, बल्कि खेती-किसानी के लिए एक बड़ी राहत बनकर बरसी है।


★ धान की रोपनी ने पकड़ी रफ्तार, खेती में लौटी रौनक

किशनगंज जिले में चाय की खेती के अलावा धान मुख्य फसल है। मानसून की इस दमदार बारिश ने यहाँ के किसानों के मुरझाए चेहरों पर बड़ी मुस्कान ला दी है। खेतों में पर्याप्त पानी जमा होने से धान की रोपनी (Paddy Transplantation) का काम युद्धस्तर पर शुरू हो गया है। ट्रैक्टरों की आवाज से खेत गूंजने लगे हैं और सीमांचल के ग्रामीण क्षेत्रों में चारों तरफ हरियाली की नई बिसात बिछने लगी है। इसके साथ ही, स्थानीय मजदूरों को अपने ही क्षेत्रों में रोजगार मिलने लगा है, जिससे पलायन की समस्या में कुछ समय के लिए कमी आई है।


★ एक ही राज्य में मौसम के दो चरम रंग

बिहार का वर्तमान मौसम भौगोलिक रूप से दो भागों में बंट चुका है। एक ओर जहाँ किशनगंज के अर्राबाड़ी कृषि अनुसंधान केंद्र परिसर में न्यूनतम तापमान गिरकर 23.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया और लोगों ने सुबह-शाम हल्की ठंडक महसूस की, वहीं दूसरी ओर दक्षिण बिहार के भभुआ (कैमूर) में सूरज आग उगल रहा है, जहाँ अधिकतम तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।


★ बिहार में अब भी 41 फीसदी वर्षा की कमी

सीमांचल की इस शानदार और रिकॉर्ड तोड़ बारिश के बावजूद, अगर समूचे बिहार की तस्वीर देखें तो स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, राज्य में अब तक कुल 44.3 मिमी बारिश हुई है, जबकि जून के इस समय तक सामान्यतः 75.5 मिमी बारिश हो जानी चाहिए थी। इसका अर्थ यह है कि बिहार वर्तमान में लगभग 41 प्रतिशत वर्षा की कमी (Rainfall Deficit) का सामना कर रहा है। दक्षिण और मध्य बिहार के किसान अभी भी आसमान में टकटकी लगाए बादलों का इंतजार कर रहे हैं।


★ आने वाले दिनों के लिए मौसम विभाग का अनुमान

मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी युक्त हवाओं के कारण आने वाले तीन से चार दिनों तक सीमांचल क्षेत्र में बादलों की सक्रियता बनी रहेगी। किशनगंज, ठाकुरगंज, गलगलिया, बहादुरगंज और पोठिया प्रखंडों में रुक-रुक कर अच्छी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा, जिससे धान की फसल को और अधिक संजीवनी मिलेगी।

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