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आरा एनकाउंटर पर अश्विनी चौबे का बड़ा हमला: बोले- 'भरत तिवारी ने डाल दिए थे हथियार, तो मारना गैर-कानूनी; दोषी पुलिसकर्मियों को मिले मृत्युदंड'

  • mdkashif3300
  • Jun 20
  • 2 min read

बिहार के भोजपुर जिले के आरा (Arrah) में हुए पुलिस एनकाउंटर का मामला अब गरमा गया है। इस मामले में अब अपनी ही सरकार के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने मोर्चा खोल दिया है। दरभंगा में मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए चौबे ने आरा पुलिस की कार्रवाई पर बेहद तीखे और गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि यदि कथित आरोपी भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था या हथियार डाल दिए थे, तो उसके बाद उसे एनकाउंटर में मार गिराना पूरी तरह से गलत, अमानवीय और भारतीय कानून के खिलाफ है।


★ दोषी पुलिसकर्मियों के लिए मृत्युदंड की मांग

अश्विनी कुमार चौबे के बयान की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने इस कथित फर्जी एनकाउंटर में शामिल दोषी पुलिस अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ केवल विभागीय कार्रवाई या निलंबन की नहीं, बल्कि मृत्युदंड (मौत की सजा) की मांग कर दी है। चौबे ने कड़े लहजे में कहा, "वर्दी पहनने का मतलब यह नहीं है कि आपको किसी की जान लेने का लाइसेंस मिल गया है। कानून से ऊपर कोई नहीं है और वर्दी के नाम पर किसी को भी कानून हाथ में लेने या समानांतर न्याय व्यवस्था चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ऐसे दोषी पुलिसवालों को जेल भेजकर कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए, जो मृत्युदंड से कम न हो।"


★ पुलिस व्यवस्था और समाज पर पड़ता है गलत असर

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि इस प्रकार की घटनाएं पूरी पुलिस व्यवस्था की साख पर गहरा बट्टा लगाती हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस का काम नागरिकों की सुरक्षा करना और आरोपियों को कानून के कटघरे में खड़ा करना है, न कि खुद जज बनकर सजा देना। इस तरह की एकतरफा कार्रवाई से समाज में एक बेहद खतरनाक और गलत संदेश जाता है, जिससे लोगों का कानून और पुलिस प्रशासन से भरोसा उठने लगता है।


★ निष्पक्ष जांच, दोषियों को सजा और मुआवजे की मांग

बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने बिहार सरकार और गृह विभाग से इस पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि एनकाउंटर के दौरान राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई सभी कानूनी प्रक्रियाओं (Guidelines) का पालन किया गया है या नहीं, इसकी गहन पड़ताल होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने पीड़ित परिवार को तुरंत उचित सरकारी मुआवजा देने और दोषियों को कानून के शिकंजे में लाने की वकालत की।


★ बिहार की राजनीति में छिड़ी नई सियासी बहस

अश्विनी कुमार चौबे के इस विस्फोटक बयान के बाद बिहार के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। जहाँ विपक्षी दल (राजद और कांग्रेस) पहले से ही बिहार में कानून व्यवस्था और एनकाउंटर की घटनाओं को लेकर सरकार को घेर रहे थे, वहीं अब सत्ताधारी दल के ही एक शीर्ष और वरिष्ठ नेता द्वारा पुलिस को कटघरे में खड़ा किए जाने से राज्य सरकार असहज स्थिति में आ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चौबे के इस बयान के बाद आने वाले दिनों में आरा एनकाउंटर का मामला विधानसभा से लेकर सड़कों तक तूल पकड़ सकता है।


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