सीमांचल में बदला मौसम का मिजाज: किशनगंज, ठाकुरगंज और बहादुरगंज में छाए काले बादल, धान की खेती में जुटे किसानों की बढ़ी उम्मीदें
- mdkashif3300
- 2 days ago
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सीमांचल में बदला मौसम का मिजाज: किशनगंज, ठाकुरगंज और बहादुरगंज में छाए काले बादल, धान की खेती में जुटे किसानों की बढ़ी उम्मीदें
बिहार के उत्तर-पूर्वी हिस्से यानी सीमांचल क्षेत्र के लोगों के लिए मौसम विभाग ने एक बेहद राहत भरी खबर दी है। पिछले कई दिनों से जारी चिलचिलाती धूप, भीषण गर्मी और चिपचिपी उमस के प्रकोप के बीच अब आसमान ने अपनी करवट बदल ली है। शनिवार सुबह से ही घने काले और मटमैले बादलों ने पूरे सीमांचल क्षेत्र को अपनी आगोश में ले लिया है। आसमान में बादलों के डेरा डालने और ठंडी हवाओं के चलने से मौसम सुहाना हो गया है। अब पूरे इलाके में सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है—क्या आज झमाझम बारिश होगी? मौसम विभाग के संकेतों से तो यही लगता है कि मानसून अब इस क्षेत्र पर पूरी तरह मेहरबान होने वाला है।
किशनगंज, ठाकुरगंज और बहादुरगंज में बदला आसमान का मिजाज
शनिवार सुबह जब किशनगंज जिला मुख्यालय, ठाकुरगंज और बहादुरगंज के निवासियों की आंख खुली, तो खिड़कियों के बाहर का नजारा बदला हुआ था। तेज धूप की जगह घने काले बादलों का साम्राज्य स्थापित हो चुका था। ठंडी पुरवा हवाओं के चलने से वातावरण में मौजूद उमस काफी हद तक कम हो गई। बादलों की लुकाछिपी के कारण चिलचिलाती धूप पूरी तरह से गायब हो गई, जिससे लोगों को काफी दिनों बाद राहत की सांस लेने का मौका मिला।
किस प्रखंड में कितनी है बारिश की संभावना?
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी वाली हवाओं के चलते सीमांचल के जिलों में मानसूनी बादल पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं। विभिन्न क्षेत्रों में बारिश की संभावना इस प्रकार है:
- **ठाकुरगंज:** यहाँ बारिश की संभावना सबसे अधिक, करीब 75 प्रतिशत आंकी गई है।
- **बहादुरगंज:** यहाँ 63 प्रतिशत बारिश के आसार हैं।
- **किशनगंज सदर:** यहाँ 60 प्रतिशत बारिश होने की उम्मीद जताई गई है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, रविवार को बारिश की तीव्रता और इसकी संभावना में और अधिक वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे पूरे क्षेत्र में अच्छी वर्षा दर्ज की जा सकती है।
धान की खेती में जुटे किसानों के चेहरे पर लौटी खुशी
मौसम में आए इस बदलाव ने सबसे अधिक खुशी सीमांचल के अन्नदाताओं (किसानों) के चेहरे पर लाई है। वर्तमान समय खरीफ फसलों, विशेषकर धान की रोपाई का है। धान के बिचड़े लगाने के लिए खेतों में पानी और नमी की प्रचुर मात्रा होनी आवश्यक है। बारिश न होने के कारण किसान काफी चिंतित थे और सिंचाई के लिए महंगे ईंधन (डीजल) पर पैसे खर्च करने को मजबूर थे।
किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर अच्छी बारिश होती रही, तो खेतों में पानी का स्तर बना रहेगा, जिससे धान की रोपाई का काम बिना किसी बाधा के संपन्न हो जाएगा। इससे खरीफ फसलों को नया जीवन मिलेगा और किसानों का खेती का खर्च भी आधा हो जाएगा।
तापमान में दर्ज की गई गिरावट, उमस से मिली मुक्ति
इस मौसम परिवर्तन के कारण क्षेत्र के तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। अगले 48 घंटों के दौरान किशनगंज और आसपास के इलाकों में अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। आसमान में बादलों की निरंतर उपस्थिति के कारण दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की कमी आ सकती है, जो लोगों को तपती गर्मी से सुकून देगी।
राहत के साथ आकाशीय बिजली का खतरा: बरतें सावधानी
मौसम विभाग ने राहत की इस खबर के साथ-साथ लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी भी दी है। मानसून के शुरुआती चरण में बादलों के टकराने से आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने का खतरा अत्यधिक रहता है। विभाग ने एडवाइजरी जारी करते हुए लोगों को सलाह दी है कि गरज-चमक के दौरान खुले आसमान के नीचे, ऊंचे पेड़ों के समीप या बिजली के खंभों के पास बिल्कुल न जाएं। किसानों से भी अनुरोध किया गया है कि खराब मौसम के दौरान वे खेतों में काम करने से बचें और सुरक्षित पक्के मकानों में शरण लें।
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