बिहार बजट में छाया पूर्णिया एयरपोर्ट, 3 महीने में विमान परिचालन शुरू करने का दावा
- MOBASSHIR AHMAD

- Mar 19, 2025
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रोशन झा
बिहार के उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार विधानसभा में साल 2025-26 का बजट पेश किया। चुनावी वर्ष को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कई बड़े ऐलान किये। बजट को देखने के बाद साफ पता चलता है कि बिहार सरकार चुनावी साल में महिला वोट बैंक को साधने के लिए हर कदम उठाने को तैयार है। आक्रोशित किसानों को मनाने के लिए उन्हें लॉलीपॉप देने को तैयार है। छात्र-छात्राओं के हितों को ध्यान में रखते हुए स्कॉलरशिप योजना को दुगना करने को तैयार है।
बजट भाषण के दौरान सम्राट चौधरी ने दावा किया कि यह बिहार का अब तक का सबसे बड़ा बजट है। हमारी सरकार बिहार को विकास की पटरी पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। हम महिलाओं के लिए पिंक बस का परिचालन करेंगे तो वही पिंक टॉयलेट का निर्माण किया जाएगा। किसान द्वारा उपजाई गई सब्जियों को सुधा काउंटर पर बिक्री किया जाएगा ताकि किसानों का मुनाफा हो सके।
पूर्णिया एयरपोर्ट से अगले 3 महीने में हवाई जहाज का परिचालन शुरू होगा
इस बार के बजट में केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने बिहार को तीन नए ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट देने का ऐलान किया था तो वहीं बजट भाषण के दौरान बिहार विधानसभा में वित्त मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि उड़ान सेवा के तहत बिहार के पूर्णिया में एयरपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है और टर्मिनल भवन बनाने को लेकर तेजी से काम हो रहा है। पूर्णिया में एयरपोर्ट का निर्माण करना बिहार सरकार के प्राथमिकता में है। अगले 3 महीने के अंदर पूर्णिया एयरपोर्ट से विमान परिचालन शुरू कर दिया जाएगा। आसान भाषा में कहा जाए तो पूर्णिया के लोग अगले 3 महीने के बाद से पूर्णिया एयरपोर्ट से दिल्ली मुंबई सहित देश के अन्य राज्यों में हवाई जहाज (एरोप्लेन) से यात्रा कर सकेंगे। हालांकि अगर ग्राउंड रिपोर्ट पर ध्यान दें तो अगले 3 महीने में पूर्णिया में एयरपोर्ट बनकर तैयार होना मुश्किल है। फिर भी चलिए नेताजी में बजट में कहा है तो 3 महीने में भले ना सही साल भर के अंदर भी अगर पूर्णिया एयरपोर्ट शुरू हो जाए तो सीमांचल के लोगों के लिए बड़ी बात होगी।
वित्त मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में तीन नए एयरपोर्ट बनाए जाएंगे। जिसमें भागलपुर का सुल्तानगंज एयरपोर्ट, राजगीर एयरपोर्ट और रक्सौल एयरपोर्ट का नाम शामिल है. इन तीनों एयरपोर्ट को विश्व स्तरीय एयरपोर्ट बनाया जाएगा। जिसको लेकर केंद्र सरकार के बजट में और बिहार सरकार के बजट में पैसा देने का ऐलान किया गया है।
इतना ही नहीं सम्राट चौधरी ने यह भी दावा किया कि मुजफ्फरपुर, मधुबनी, सहरसा, मुंगेर, भागलपुर का पुराना एयरपोर्ट, वाल्मीकि नगर में भी एयरपोर्ट को डेवलप किया जाएगा और यहां से 19 सीटों की क्षमता वाले हवाई जहाज का परिचालन किया जाएगा. ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी ना हो और उन्हें दिल्ली मुंबई कोलकाता जाने के लिए अपने जिले से अधिक दूर जाना ना पड़े।
बताते चले कि पहले से बिहार की राजधानी पटना में एयरपोर्ट है और पटना के ही बिहटा में नए इंटरनेशनल एयरपोर्ट का निर्माण हो रहा है। दरभंगा में पहले से ही एयरपोर्ट का निर्माण हो चुका है और गया में भी एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। अगर तीन नए एयरपोर्ट को जोड़ दिया जाए तो बिहार में 6 बड़े और 6 छोटे छोटे एयरपोर्ट हो जाएंगे।
बिहार बजट में महिलाओं के लिए तोहफा ही तोहफा

बिहार बजट में इस बार सम्राट चौधरी ने सबसे ज्यादा महिलाओं का ध्यान रखा है और उन्हें बिन मांगे बहुत कुछ दे दिया है। हालांकि यह बजट कहने के लिए बिहार का बजट है लेकिन आप इसे महिला स्पेशल बजट कह सकते हैं। हम जब महिला कहते हैं तब इसमें महिलाओं के साथ-साथ हमने छात्रों को भी जोड़ लिया है। सबसे पहले आपको यह बता देते हैं कि बजट भाषण के दौरान सम्राट चौधरी ने महिलाओं के लिए क्या-क्या ऐलान किया है।
बजट भाषण के दौरान सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में पिंक बस का परिचालन किया जाएगा जिसमें सिर्फ और सिर्फ महिला पैसेंजर्स को ही चढ़कर यात्रा करने की सुविधा दी जाएगी। इतना ही नहीं इस पिंक बस का ड्राइवर और कंडक्टर भी महिलाओं को बनाया जाएगा। महिला ड्राइवर को बस परिचालन करने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी। अगर कोई महिला ई रिक्शा खरीदना चाहती है और रोजगार करना चाहती है तो उन्हें सरकारी अनुदान दिया जाएगा। यह सुविधा महिलाओं द्वारा मोटरसाइकिल या स्कूटी खरीदने के लिए भी देने का ऐलान किया गया है। महिलाओं के लिए ड्राइविंग सेंटर खुलेंगे, ट्रेनर भी महिलाएं होंगी।
पिंक टॉयलेट को लेकर वित्त मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार की राजधानी पटना सहित बिहार के सभी जिलों में महिलाओं के लिए स्पेशल पिंक टॉयलेट का निर्माण किया जाएगा ताकि नौकरी करने वाली महिलाओं को किसी तरह की परेशानी ना हो। हम और आप जानते हैं कि बिहार में महिलाओं के लिए नौकरी में 50% का आरक्षण है इसलिए अधिकांश महिलाएं अब टीचर की नौकरी से लेकर सभी सेक्टर में नौकरी करती है। इसलिए पिक टॉयलेट का निर्माण किया जाएगा.
रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन में जो बिहार सरकार द्वारा नौकरी दी जाती है उसमें महिलाओं को 33% का आरक्षण दिया जाएगा।
अपने घर से दूर रहकर नौकरी करने वाली महिलाओं के लिए सबसे बड़ा ऐलान करते हुए नीतीश सरकार ने कहा है कि हम शहरों में काम करने वाली महिलाओं के लिए हॉस्टल खोलेंगे और उन्हें आवासीय सुविधा देने का काम करेंगे।
बिहार के सभी पंचायत में गरीब लड़कियों के विवाह के लिए बिहार सरकार द्वारा कन्या मंडप का निर्माण किया जाएगा ताकि गरीब घर की बेटियों का विवाह हो सके।
अगर आप छात्रों की बात करेंगे तो बिहार सरकार द्वारा जितनी भी स्कॉलरशिप योजनाएं चलाई जा रही है सभी की राशियों को दोगुना कर दिया गया है। महिलाओं के लिए स्पेशल जिम खोला जाएगा।
बजट में जदयू के मंत्रियों से बहुत ज्यादा बीजेपी के मंत्रियों को मिला पैसा

अगर इस बजट को आप गौर से देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि यह बजट भी एक तरह से गठबंधन का बजट है. जो जो विभाग बिहार में भाजपा नेताओं के पास है, उस विभाग में जबरदस्त पैसों का आवंटन किया गया तो वहीं जो जो विभाग जदयू नेताओं के पास है उसमें बहुत कम पैसे दिए गए। अगर आप निर्दलीय विधायक और अन्य दल के नेताओं के पास जो विभाग है उसकी बात करें तो उन्हें कुछ भी नहीं मिला।
आसान भाषा में समझिए तो इस बार के बजट में बिहार सरकार के उन विभागों में जिस विभाग का जिम्मा भाजपा नेताओं के पास है, उसके लिए 161525.61 करोड़ रुपए दिए गए हैं. नेताओं के पास जो विभाग है उसके लिए 154923.7 करोड रुपए दिए गए हैं. एक तरह से कहा जाए तो बीजेपी की तुलना में जदयू के नेताओं को 6601.91 करोड रुपए कम दिए गए हैं.
अब यह भी जान लीजिए कि भाजपा जदयू के अलावे जो विभाग नीतीश सरकार में शामिल अन्य दल के नेता है उनको क्या मिला. हम के मंत्री संतोष कुमार सुमन के विभाग में 1839.11 करोड़ और निर्दलीय विधायक सुमित कुमार सिंह के विभाग में मात्र 1159 करोड़ दिए गए हैं.
इस बजट में सबसे ज्यादा पैसा शिक्षा पर दिया गया जो कि जदयू के मंत्री सुनील सिंह के पास है तो उसके बाद कृषि पर दिया गया जो कि भाजपा के नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के पास है। शिक्षा विभाग को 60964.87 करोड़ रुपये दिये गये है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास जो जो विभाग है उसके लिए सबसे अधिक 83205.66 करोड रुपए दिए गए हैं। इसके बाद सबसे अधिक स्वास्थ्य विभाग को 2003 5.80 करोड़ दिए गए हैं। गृह विभाग को 17831.21 करोड़ दिए गए हैं तो ग्रामीण विकास विभाग को 16093.46 और ऊर्जा विभाग को 13484 करोड रुपए दिए गए हैं।
कृषि क्षेत्र को बिहार में भले महत्वपूर्ण माना जाता हो लेकिन आपको जानकर आश्चर्य लगेगा कि इस बजट में मात्र 1.1 1% खेती पर खर्च होने हैं। पथ निर्माण विभाग को 68006 करोड रुपए दिए गए हैं।
बताते चलें कि बिहार में कैबिनेट विस्तार होने के बाद जदयू कोटे से जहां 13 मंत्री है तो वहीं भाजपा कोटे से 21 मंत्री हैं
बजट के बाद नीतीश ने सम्राट को गले लगाया

बिहार विधानसभा में जब वित्त मंत्री सम्राट चौधरी बजट भाषण पढ़ रहे थे तो इसके बाद बिहार विधानसभा में जो नजारा दिखा, वह अपने आप में अद्भुत था। बजट भाषण के बाद पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने वित्त मंत्री को सबके सामने गले लगाकर शुभकामना संदेश देने का काम किया। हुआ यूं कि जैसे ही वित्त मंत्री सम्राट चौधरी का बजट भाषण हुआ वैसे ही उनके बगल में बैठे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उठे और उन्हें अपने गले से लगा लिया और पीठ थपथपाने लगे. मानों मुख्यमंत्री का रहे हो कि तुम्हारा बजट शानदार बजट है. सम्राट चौधरी ने भी तुरंत हाथ जोड़कर शीश झुकाया और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अभिवादन किया.
विधानसभा में बच्चों की तरह लड़ने लगे नीतीश-तेजस्वी, एक बोला नकारा, दूसरे ने कहा तुम गड़बड़ कर रहा था...
बिहार विधानसभा में उस वक्त एक अजीब नजारा देखने को मिला, जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव आपस में लड़ने लगे। राज्यपाल के अभिभाषण पर जवाब देते हुए पहले तेजस्वी यादव ने जहां सरकार की कमियों को गिनाया और बिहार सरकार को नकारा बताया तो बाद में तेजस्वी के भाषण पर जवाब देने के लिए उठे नीतीश कुमार ने एक-एक कर बताया कि उनकी सरकार में क्या-क्या हुआ।
एक वक्त ऐसा भी आया जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने काम को गिना रहे थे तब तेजस्वी यादव ने कहा कि तब हमारी सरकार थी, इस पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि तुम तो गड़बड़ कर रहा था। हम मुख्यमंत्री थे और तुम डिप्टी सीएम. जो क्या हमने किया, तुम्हारा कोई योगदान नहीं है।
तेजस्वी का आरोप था कि बिहार में एनडीए सरकार पूरी तरह फैल है, लॉ एंड ऑर्डर व्यवस्था चौपट हो चुका है। नीतीश सरकार एक खटारा सरकार है और सिस्टम भी नकारा हो चुका है। मुख्यमंत्री जी को देखकर लगता है कि वे थक चुके हैं अब उनके पास काम करने का कोई विजन नहीं है। आम आदमी मारा मारा फिर रहा है।
जवाब देते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि साल 2005 से पहले शाम होते ही लोग डर के कारण अपने घर से नहीं निकलते थे। हम जब मुख्यमंत्री बने तो सड़क बिजली शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक काम किए। यही कारण है कि आज बिहार के किसी भी गांव से लोग 4 से 5 घंटा में पटना आ जाते हैं। गांव में भी 24 घंटे बिजली उपलब्ध रहती है।

तेजस्वी ने कहा कि मेरे पिता जब मुख्यमंत्री थे, उन्होंने वंचित समाज को अधिकार दिलाने का काम किया। सामंतवादी सोच वाले लोग वंचित समाज के लोगों को बराबरी का अधिकार नहीं देते थे। खटिया पर बैठने नहीं देते थे, पिछले समाज के लोगों को राजनीति में कोई प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाता था। कांग्रेस के शासन में 22 बार मुख्यमंत्री को बदला जा चुका था। जब मेरे पिता सत्ता में आए तो उन्होंने स्थाई सरकार देने का काम किया।
तेजस्वी के किसी बात का जवाब देते हुए पहले नीतीश कुमार गुस्सा गए और कहा की तुम्हारे पिता को मुख्यमंत्री किसने बनाया। हम थे जिनकी मदद से वह मुख्यमंत्री बने। जब हम तुम्हारे पिता को मुख्यमंत्री बना रहे थे उस समय तुम्हारे जात के लोग ही कहते थे कि आप ऐसा क्यों कर रहे हैं। लालू यादव अति पिछड़ों और पिछड़ों के कोटे को एक करना चाहते थे, जिसे हमने विरोध किया और यही कारण था कि साल 1994 में हम उनसे अलग हो गए।
मामला जब अधिक गर्मा गया तो तेजस्वी यादव यह कहते हुए सदन से वॉकआउट कर गए कि हम सरकार की विफलताओं के खिलाफ वॉकआउट कर रहे हैं तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जवाब देते हुए कहा कि देखिए यह लोग भाग गया। अगला चुनाव होगा तो इन लोगों को कुछ नहीं मिलने वाला है यह लोग सिर्फ आरोप लगाते हैं लेकिन खुद कोई काम नहीं करते हैं।
इसके बाद तेजस्वी यादव आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार के राजनीति में कुछ ऐसे नेता भी है जो 1990 से पहले सत्ता का लाभ उठा रहे थे और वही लोग बाद में भाजपा जदयू में शामिल होकर मलाई खा रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी का बर्ताव तो ऐसा लगता है कि 2005 से पहले बिहार था ही नहीं और बिहार में जो कुछ है वह सब उन्होंने किया है।

इस बात का जवाब देते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि जंगलराज से हमने बिहार को मुक्त करवाया है। हमने बिहार को अपराध मुक्त बनाया है। 10 लाख से अधिक नौकरियां दी है। 24 लाख युवाओं को रोजगार करने के लिए लोन दिया है। अगले 6 महीने में 50 लाख से अधिक युवाओं को नौकरी और रोजगार देने का काम किया जाएगा।
राज्यपाल के अभिभाषण पर नेता प्रतिपक्ष ने जमकर निशाना साधा। तेजस्वी यादव का कहना था कि राज्यपाल का भाषण कंफ्यूज करने वाला था। लग रहा था कि जैसे शमशान में विवाह का गीत बजाया जा रहा है। अभिभाषण इस साल का था या पिछले साल का कुछ समझ नहीं आया।
इस बात का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्यपाल का जो भाषण है, वह बिहार की विकास का एक तरह से दस्तावेज है। हम लोग नवंबर 2005 में सत्ता में आए थे। मुझे मुख्यमंत्री बनाया गया था और उसके बाद से एक-एक करके जो कुछ हम लोगों ने बिहार और बिहार के लोगों के लिए किया, उसका उल्लेख राज्यपाल की अभिभाषण में है।
बिहार विधानसभा में खूब गरजे तेजस्वी यादव, सदन से गायब दिखे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

एक दिन पहले बिहार विधानसभा में वित्त मंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार का बजट पेश किया तो आज राज्यपाल के अभिभाषण पर अपना पक्ष रखते हुए तेजस्वी यादव खूब गरजे. इस दौरान उन्होंने नीतीश सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि राज्यपाल नये नये बिहार आए हैं, इसलिए उन्हें बहुत बात मालूम नहीं है। 2005 से लेकर अब तक दो बार हमारे साथ नीतीश जी सरकार बना चुके हैं. उनके भाषण को सुनने के बाद पता ही नहीं चला कि वे 2005 के बाद का भाषण पढ़ रहे हैं या 2010 के बाद का या 2015 के बाद का या 2020 के बाद का. हमारे हाथ में भी पिछले राज्यपाल विश्वनाथ जी का एक भाषण है और यह भाषण तब का है, जब हम और नीतीश कुमार जी साथ हुआ करते थे।
मुख्यमंत्री जी हमेशा कहते हैं कि साल 2005 से पहले कुछ था ही नहीं, जो किया हमने किया तो हम आपको बारी बारी से बताते हैं कि 2005 से पहले क्या था और क्या नहीं था। बिहार में 6 विश्वविद्यालय हुआ करता था, इनमें से अधिकांश लालू जी के काल में बना। यहां पहले भी मेडिकल कॉलेज था। नीतीश जी इस जंगलराज के शासन से पहले इंजीनियरिंग की पढ़ाई पटना में कर चुके थे और रेल मंत्री बन चुके थे। लालू जी ने बिहार में रेल फैक्ट्री बनाने का काम किया।
गरीब वंचित समाज को प्रताड़ित किया जाता था। लालू जी ने उनके साथ दिया और उन्हें खटिया पर बैठाने सहित बराबरी का हक देने का काम किया। लालू जी के राज में कई सारे केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय का निर्माण किया गया। वर्तमान केंद्र की मोदी सरकार में बिहार को एक भी नया केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय नहीं मिला।
नीतीश जी के शासन में एक ही पुल बार-बार ध्वस्त हो जाता है। चूहा बांध में छेद करता है तो चूहा लाखों लीटर शराब पी जाता है। इस बार के बजट में महिलाओं के लिए कोई खास व्यवस्था नहीं की गई है। बिहार के अधिकांश लोग चाहते हैं कि मैं (तेजस्वी) मुख्यमंत्री बनकर नया बिहार का निर्माण करूं |.
राज्यपाल के अभिभाषण पर अपना पक्ष रखते हुए कई बार तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा और विजय चौधरी पर चुटकी ली। इस दौरान सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के साथ कई बार नोक-झोंक भी देखने को मिला।
सम्राट चौधरी बोले, लालू शासन में सिर्फ लौंडा नाच होता था

राज्यपाल के अभिभाषण पर अपना पक्ष रखते हुए तेजस्वी ने जमकर बोला और सम्राट चौधरी सहित भाजपा के तमाम बड़े नेताओं पर जमकर निशाना साधा था, लेकिन जब अगले दिन सम्राट चौधरी को बोलने का मौका मिला तो उन्होंने न सिर्फ तेजस्वी यादव बल्कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी तक को नहीं छोड़ा। एक तरह से कह सकते हैं कि वह दिन सम्राट चौधरी का था और वह चौके छक्के की बरसात कर रहे थे। हालांकि जब सम्राट चौधरी बोल रहे थे तब तेजस्वी यादव सदन में उपस्थित नहीं थे। अगर वे उपस्थित रहते तो स्थिति गंभीर हो सकती थी और मारा-मारी की नौबत भी आ सकती थी.
सम्राट चौधरी ने कहा कि लालू शासन में एक भी काम नहीं हुआ। लालू राबड़ी शासन में सिर्फ सीएम आवास में लौंडा नाच होता था. कुर्ता फाड़ होली का आयोजन किया जाता था। अगर लालू राबड़ी सरकार में विकास का एक भी काम हुआ होता तो नीतीश कुमार को सत्ता में आने की जरूरत नहीं होती और तेजस्वी जी को विपक्ष में बैठना नहीं पड़ता। तेजस्वी तो बउआ है अर्थात बच्चा है, मैट्रिक पास भी नहीं है। पढ़ना लिखना उसके बस की बात नहीं है। इसलिए क्या सही उत्तर है और क्या गलत, वह नहीं जानता। उसे कुछ भी नहीं मालूम। किसी ने भाषण लिख दिया और उसने बिहार विधानसभा में पढ़ दिया. वह ना अच्छा से पढ़ाई कर पाया और ना अच्छा से क्रिकेट खेल पाया. क्रिकेट में 12वां प्लेयर बनकर सिर्फ पानी बोतल ढोने का काम करता रहा।
लालू शासन में अगर मुख्यमंत्री के कोठे पर किसी का एडमिशन होता था तो वह लालू प्रसाद यादव की बेटी निशा भारती का मेडिकल में हुआ था। क्रिकेट कोटे से तेजस्वी को खिलाड़ी बना दिया गया। कुल मिलाकर सम्राट चौधरी का कहना था कि तेजस्वी ने राज्यपाल के अभिभाषण पर जो कुछ कहा वह गलत है। 2005 से पहले बिहार में कई विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज हुआ करता था लेकिन उन सभी विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज का निर्माण लालू राबड़ी शासन में नहीं हुआ, बल्कि पहले ही हो चुका था.
बिहार के पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्र को चारा चोर बोलने पर हुआ हंगामा

राज्यपाल के अभिभाषण पर सदन में बैठे नीतीश मिश्रा पर हमला करते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि मेरे पिता को चारा चोर कहा जाता है लेकिन बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा जो कि चारा घोटाले में जेल जा चुके हैं उनके बेटे नीतीश मिश्रा को बीजेपी और जदयू ने मंत्री बना कर रखा हुआ है। क्या यह वंशवाद नहीं है, लालू जी पिछड़ा समाज से आते हैं इसलिए उन्हें चारा चोर कहा जाता है और जगन्नाथ मिश्र ब्राह्मण परिवार से आते हैं इसलिए कभी भी उन्हें चारा चोर नहीं कहा जाता.
हालांकि बाद में नीतीश मिश्रा ने तेजस्वी यादव पर जमकर निशाना साधा और कहा कि तेजस्वी यादव ने 04 मार्च को सदन में आधी-अधूरी जानकारी के साथ अपनी बात रखी और सदन के साथ-साथ बिहार की जनता को भी गुमराह करने का प्रयास किया।
यह स्थिति तब है जब उन्होंने 04 मार्च को अपने भाषण की शुरुआत में ही कहा था कि वह तथ्यों की बात करेंगे जबकि श्रद्धेय डॉ. जगन्नाथ मिश्र जी द्वारा की गयी 6 विश्वविद्यालयों के स्थापना की घोषणा को बिना किसी तथ्य के अपना बता दिया।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार में 6 विश्वविद्यालयों, जिनकी स्थापना की घोषणा वर्ष 1983-84 में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रद्धेय डॉ. जगन्नाथ मिश्र द्वारा की गई थी, उसका श्रेय विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री श्री लालू प्रसाद यादव को दिया जोकि पूरी तरह भ्रामक एवं तथ्यों से परे है।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को अवगत कराना चाहता हूं कि वर्ष 1983-84 के बजट भाषण के दौरान 11 मार्च 1983 को तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रद्धेय डॉ. जगन्नाथ मिश्र द्वारा (1) जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा (2) भारती मंडन विश्वविद्यालय, सहरसा (3) बाबू कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा (4) विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग (5) मजहरूल हक अरबी एवं परसीयन विश्वविद्यालय, पटना (6) संथाल परगना विश्वविद्यालय, दुमका के स्थापना की घोषणा की गई। जिसमें से बाद में भारती मंडन विश्वविद्यालय, सहरसा की स्थापना बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा के रूप में और संथाल परगना विश्वविद्यालय, दुमका को सिद्धू कान्हू विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित किया गया और शेष विश्वविद्यालय यथास्थान बनाए गए।
14 अगस्त 1983 को श्रद्धेय डॉ. जगन्नाथ मिश्र के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद जब वह पुनः 6 दिसम्बर 1989 से 10 मार्च 1990 तक मुख्यमंत्री रहे तो उस दौरान 18 जनवरी 1990 को तत्कालीन राज्यपाल श्रद्धेय जगन्नाथ पहाड़िया द्वारा बिहार विधान-मंडल के संयुक्त अधिवेशन में बजट अभिभाषण के दौरान भी उक्त 6 विश्वविद्यालयों की स्थापना का जिक्र किया गया था।
उक्त सभी दस्तावेज बिहार विधानसभा की कार्यवाही में दर्ज हैं और आज भी रिकॉर्ड के रुप में उपलब्ध हैं जिन्हें कोई भी व्यक्ति देख सकता है और इसकी सत्यता की पुष्टि कर सकता है। यदि नेता प्रतिपक्ष श्री तेजस्वी यादव की यही तथ्यपरक तैयारी थी तो मैं उनके तथ्य आधारित जानकारी के विषय में कुछ न ही कहूँ, वही बेहतर होगा।
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