किशनगंज में आधी रात को घर के बाहर मिला दुर्लभ जीव 'पैंगोलिन', पूरे गांव में मचा हड़कंप, वन विभाग ने किया रेस्क्यू
- mdkashif3300
- 6 hours ago
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ठाकुरगंज (किशनगंज): बिहार के सीमावर्ती जिला किशनगंज के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत पथरिया पंचायत के पथरिया गांव में बुधवार देर रात प्रकृति का एक बेहद दुर्लभ और रोमांचक नजारा देखने को मिला। गांव के एक रिहायशी मकान के बाहर अचानक दुनिया के सबसे शर्मीले और विलुप्तप्राय वन्यजीवों में शामिल पैंगोलिन (Pangolin) के दिखाई देने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
बताया जाता है कि आधी रात के समय घर के बाहर किसी अनजान और विचित्र जीव को घूमते देख परिजनों के होश उड़ गए। देखते ही देखते गांव में शोर मच गया और ग्रामीण लाठी-डंडे तथा टॉर्च लेकर मौके पर पहुंच गए। शुरुआत में जीव की पीठ पर मौजूद कठोर कवच और अनोखी बनावट को देखकर लोग डर गए, लेकिन कुछ जागरूक ग्रामीणों ने उसकी पहचान पैंगोलिन के रूप में की।
वन विभाग की टीम ने देर रात किया रेस्क्यू
ग्रामीणों द्वारा तत्काल वन विभाग को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही विभाग की रेस्क्यू टीम देर रात ही आवश्यक उपकरणों के साथ गांव पहुंची और पूरी सावधानी बरतते हुए पैंगोलिन को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर लिया। इसके बाद उसे विभागीय रेस्क्यू सेंटर ले जाया गया।
वन अधिकारियों ने बताया कि पैंगोलिन अत्यंत दुर्लभ और संरक्षित वन्यजीव है, जिसे भारतीय वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत सर्वोच्च सुरक्षा प्राप्त है। इसके पूरे शरीर पर केराटिन से बने कठोर शल्क होते हैं, जो इसे प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करते हैं।
तस्करी का शिकार होने वाला अत्यंत दुर्लभ जीव
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, पैंगोलिन दुनिया के सबसे अधिक अवैध शिकार और तस्करी का शिकार होने वाले स्तनधारी जीवों में शामिल है। इसके शल्कों और अंगों को लेकर फैली औषधीय भ्रांतियों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी तस्करी की जाती है, जिससे इसकी संख्या लगातार घट रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पैंगोलिन इंसानों के लिए पूरी तरह हानिरहित होता है। यह मुख्य रूप से चींटियों और दीमकों को खाता है, जिससे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
लोगों की उमड़ी भीड़, वन विभाग की अपील
गुरुवार सुबह तक पथरिया गांव में पैंगोलिन के मिलने की खबर पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रही। आसपास के पंचायतों से भी बड़ी संख्या में लोग इस दुर्लभ जीव को देखने पहुंचे।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल पैंगोलिन को चिकित्सकीय निगरानी में सुरक्षित रखा गया है और उसकी स्वास्थ्य जांच की जा रही है। सभी कानूनी और चिकित्सकीय प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद उसे उसके प्राकृतिक आवास यानी घने जंगल या किसी सुरक्षित संरक्षित क्षेत्र में छोड़ दिया जाएगा।
वन विभाग ने सीमांचल क्षेत्र के लोगों से अपील की है कि यदि किसी को पैंगोलिन, अजगर या कोई अन्य दुर्लभ वन्यजीव दिखाई दे तो उसे पकड़ने, छेड़ने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग या प्रशासन को सूचना दें ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह घटना सीमांचल क्षेत्र के लिए वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता का एक महत्वपूर्ण संदेश लेकर आई है।

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