किशनगंज में मानसून की दस्तक: झमाझम बारिश से बदला मौसम, धान की रोपाई कर रहे किसानों के खिले चेहरे, वज्रपात का अलर्ट
- mdkashif3300
- Jun 27
- 3 min read

किशनगंज में मानसून की दस्तक: झमाझम बारिश से बदला मौसम, धान की रोपाई कर रहे किसानों के खिले चेहरे, वज्रपात का अलर्ट
सीमांचल क्षेत्र के किशनगंज जिले के लोगों के लिए शनिवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। लंबे इंतजार के बाद जिले में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। शनिवार सुबह से ही आसमान घने काले बादलों से ढका रहा और तेज ठंडी हवाओं के साथ झमाझम बारिश शुरू हो गई। इस बारिश के साथ ही पिछले कई दिनों से पड़ रही चिलचिलाती गर्मी और उमस से बेहाल लोगों को आखिरकार बड़ी राहत मिल गई है। मानसून की इस सक्रियता ने न केवल शहर के तापमान को गिराया है, बल्कि खरीफ फसलों की बुवाई और धान की रोपाई कर रहे किसानों के चेहरों पर भी मुस्कान बिखेर दी है।
जिले के सभी 7 प्रखंडों में बारिश का पूर्वानुमान
मौसम पूर्वानुमान एजेंसी और मौसम विभाग के अनुसार, किशनगंज जिले के सभी सातों प्रखंडों—किशनगंज सदर, ठाकुरगंज, बहादुरगंज, टेढ़ागाछ, दिघलबैंक, पोठिया और कोचाधामन में मानसूनी बादल पूरी तरह छाए हुए हैं और रुक-रुक कर मध्यम से भारी बारिश होने की प्रबल संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि कुछ क्षेत्रों में तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश भी हो सकती है। मानसूनी हवाओं के चलने से अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और यह 33 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है, जिससे वातावरण में ठंडक घुल गई है।
अगले 48 घंटे तक मौसम विभाग का 'येलो अलर्ट'
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी वाली हवाओं के कारण अगले 24 से 48 घंटे तक किशनगंज और आसपास के सीमांचल जिलों में मानसूनी गतिविधियां काफी तेज बनी रहेंगी। इसे देखते हुए विभाग ने जिले में आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली (वज्रपात) को लेकर 'येलो अलर्ट' जारी किया है। ठंडी हवाओं की वजह से उमस भरी गर्मी से लोगों को जो राहत मिली है, वह आने वाले दो-तीन दिनों तक बरकरार रहने की उम्मीद है।
धान की रोपाई में जुटे किसानों के खिले चेहरे, कृषि क्षेत्र को संजीवनी
किशनगंज जिला मूल रूप से कृषि आधारित जिला है, जहाँ की अधिकांश आबादी धान, चाय और जूट की खेती पर निर्भर करती है। जून का आखिरी हफ्ता धान की रोपाई (पैडी ट्रांसप्लांटेशन) के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इससे पहले बारिश न होने के कारण किसान खेतों की तैयारी और रोपाई को लेकर काफी चिंतित थे और महंगे डीजल पंपसेटों के सहारे सिंचाई करने को मजबूर थे।
इस मानसूनी बारिश ने किसानों के लिए संजीवनी का काम किया है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त वर्षा होने से खेतों में प्राकृतिक नमी बढ़ेगी, जिससे धान की पौध (बिचड़ा) की रोपाई में तेजी आएगी। इससे न केवल फसलों की गुणवत्ता अच्छी होगी, बल्कि किसानों का सिंचाई पर होने वाला भारी-भरकम खर्च भी काफी हद तक कम हो जाएगा।
जलजमाव और वज्रपात का खतरा: बरतें सावधानी
राहत की इस बारिश के साथ ही प्रशासन और मौसम विभाग ने कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह भी दी है। लगातार मूसलाधार बारिश होने की स्थिति में किशनगंज शहर के निचले इलाकों, स्थानीय बाजारों और ग्रामीण क्षेत्रों की कच्ची सड़कों पर जलजमाव (वॉटरलॉगिंग) की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
इसके साथ ही, सीमांचल क्षेत्र में मानसून के दौरान आकाशीय बिजली गिरने (वज्रपात) से हर साल कई लोगों की जान जाती है। इसे देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने एडवाइजरी जारी कर लोगों से अपील की है कि वे गरज-चमक और बारिश के दौरान खुले मैदानों, ऊंचे पेड़ों के नीचे और जलाशयों (नदी, तालाब) के पास जाने से बचें। विशेषकर किसानों को सलाह दी गई है कि जब आसमान में बिजली कड़क रही हो, तो खेतों में काम करना तुरंत बंद कर सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं।
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