किशनगंज में महानंदा नदी का रौद्र रूप: ठाकुरगंज में उफान पर नदी, 61 करोड़ के निर्माणाधीन आरसीसी पुल के ढांचे पर खतरा; मानसून की पहली परीक्षा

बिहार के सीमांचल क्षेत्र अंतर्गत किशनगंज जिले में मानसून ने अभी केवल दस्तक ही दी है, लेकिन पहाड़ी इलाकों और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश का सीधा असर मैदानी इलाकों में दिखने लगा है। जिले की लाइफलाइन कही जाने वाली महानंदा नदी ने मानसून की शुरुआत में ही अपना रौद्र रूप धारण कर लिया है। महानंदा नदी के तेजी से बढ़ते जलस्तर ने ठाकुरगंज प्रखंड में निर्माणाधीन एक बड़े पुल के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है, जिससे स्थानीय प्रशासन, ग्रामीणों और निर्माण एजेंसी की चिंताएं बेहद बढ़ गई हैं।
★ उफनती धारा के बीच संघर्ष करता निर्माणाधीन ढांचा
ठाकुरगंज के पास केटीटीजी (KTTG) सड़क मार्ग पर बन रहे इस नए पुल की साइट पर पानी का बहाव बेहद तेज हो गया है। नदी के बीचों-बीच खड़े विशाल लोहे के पाइप, कंक्रीट पिलर के लिए लगाए गए भारे (Scaffolding) और अन्य अस्थायी सुरक्षात्मक ढांचे पानी की उफनती लहरों और भारी दबाव के बीच संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। पहाड़ों से बहकर आ रहे पानी के साथ बड़ी मात्रा में जलीय खरपतवार और लकड़ी के टुकड़े भी बहकर आ रहे हैं, जो इन खंभों में फंसकर पानी के दबाव को और बढ़ा रहे हैं। स्थानीय लोगों के बीच यह नजारा गहरी चिंता और चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या यह पुल मानसून की इस पहली परीक्षा को झेल पाएगा।
★ 111 साल पुराने पुल की जगह ले रहा 61 करोड़ का नया प्रोजेक्ट
उल्लेखनीय है कि यह पुल कोई साधारण निर्माण नहीं है, बल्कि यह इस क्षेत्र के लोगों के लिए परिवहन की मुख्य कड़ी है। केटीटीजी सड़क मार्ग पर स्थित 111 वर्ष पुराने ऐतिहासिक जर्जर पुल की जगह अब इस आधुनिक और मजबूत आरसीसी (RCC) पुल का निर्माण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विशेष घोषणा और पहल के बाद स्वीकृत हुई इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कुल 61 करोड़ 81 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की जा रही है। पुराने पुल के जर्जर हो जाने के कारण बड़े वाहनों का परिचालन बंद था, जिससे ठाकुरगंज और आसपास की एक बड़ी आबादी को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही थी। यह नया पुल सीमांचल के लाखों लोगों के लिए सुगम यातायात और विकास की नई उम्मीद बनकर खड़ा हो रहा है।
★ मानसून की पहली बड़ी परीक्षा और निर्माण एजेंसी की सांसें अटकीं
मानसून के दस्तक देते ही महानंदा नदी का विकराल होना कोई नई बात नहीं है। प्रत्येक वर्ष यह नदी बरसात में विनाशलीला रचती है। हालांकि, निर्माण एजेंसी को उम्मीद थी कि मानसून आने से पहले पिलर और बेस का मुख्य काम काफी हद तक सुरक्षित कर लिया जाएगा, लेकिन समय से पहले नदी के उफान पर आने से निर्माण कार्य की रफ्तार पर ब्रेक लगने की आशंका बन गई है। यदि नेपाल और उत्तर बिहार के पहाड़ों पर बारिश का यह सिलसिला अगले दो-तीन दिनों तक इसी प्रकार जारी रहा, तो पानी का स्तर और अधिक बढ़ जाएगा, जिससे नदी के बीच में खड़े अस्थायी ढांचे बह सकते हैं और पूरा प्रोजेक्ट कई महीनों के लिए पिछड़ सकता है।
★ लाखों लोगों की उम्मीदों का पुल
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह ड्रीम प्रोजेक्ट ठाकुरगंज को पूर्णिया, अररिया और सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) से सीधे और कम समय में जोड़ने के लिए बेहद आवश्यक है। लोगों की निगाहें अब पूरी तरह से महानंदा के जलस्तर और निर्माण एजेंसी की तकनीकी तैयारी पर टिकी हैं। क्या एजेंसी आधुनिक तकनीकों और अतिरिक्त सुरक्षात्मक उपायों के जरिए नदी के इस प्रचंड वेग को नियंत्रित कर पाएगी, या फिर मानसून की पहली मूसलाधार बारिश इस बहुप्रतीक्षित 61 करोड़ की परियोजना की रफ्तार को धीमा कर देगी, यह आने वाले कुछ दिन तय करेंगे। फिलहाल महानंदा की तेज गर्जना और उसके बीच डटे लोहे के ढांचे एक बेहद रोमांचक और चुनौतीपूर्ण तस्वीर पेश कर रहे हैं।
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