कटिहार के कोढ़ा में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी सड़क: 30 लाख की लागत से बनी सड़क 5 महीने में ही टूटी, सिमरिया के ग्रामीणों में भारी आक्रोश
- mdkashif3300
- 9 hours ago
- 2 min read
कटिहार के कोढ़ा में सरकारी पैसे की बंदरबांट: पांच महीने पहले बनी 30 लाख की सड़क उखड़ी, सिमरिया पंचायत के लोग परेशान
कोढ़ा (कटिहार):
बिहार में सरकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट का एक और मामला कटिहार जिले से सामने आया है। कोढ़ा प्रखंड अंतर्गत सिमरिया पंचायत में चार धार से सलाम चौक तक लगभग 30 लाख रुपये की मोटी सरकारी लागत से नवनिर्मित पक्की सड़क महज पांच महीने के भीतर ही टूटकर जर्जर होने लगी है। सड़क की इस दयनीय हालत ने न केवल स्थानीय ग्रामीणों के सुगम आवागमन के सपने को तोड़ दिया है, बल्कि सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और इसमें शामिल ठेकेदार व विभागीय अधिकारियों की साठगांठ पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उखड़ गई डामर और सीमेंट की परत, सड़क पर बिखरी गिट्टियां
सिमरिया पंचायत के स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जिस सड़क के निर्माण से उन्हें उम्मीद थी कि आने वाले कई वर्षों तक उन्हें उबड़-खाबड़ रास्तों से मुक्ति मिलेगी, वह सड़क अब चलने लायक भी नहीं बची है। सड़क के कई हिस्सों से डामर और सीमेंट की ऊपरी सुरक्षात्मक परत पूरी तरह से उखड़ चुकी है। पूरी सड़क पर नुकीली गिट्टियां बिखरी पड़ी हैं, जिससे वाहनों का चलना दूभर हो गया है। कुछ मुख्य स्थानों पर तो हालत यह है कि कंक्रीट की मजबूत परत पूरी तरह गायब हो चुकी है और नीचे की मिट्टी दिखाई देने लगी है, जो सड़क की लचर मजबूती को साबित करती है।
राहगीर हो रहे हादसों के शिकार, बाइक सवार फिसल रहे
ग्रामीणों के अनुसार, सड़क की इस जर्जर स्थिति के कारण इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों को रोजाना भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क पर बिखरी गिट्टियों के कारण दुपहिया वाहनों के टायर फिसलने से कई बाइक सवार गिरकर चोटिल हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त, तेज नुकीली गिट्टियों की वजह से गाड़ियों के टायर पंचर होने की घटनाएं भी बहुत आम हो गई हैं, जिससे इस मार्ग से सफर करने वाले लोगों में स्थानीय प्रशासन के प्रति भारी आक्रोश व्याप्त है।
घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग का आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग
स्थानीय लोगों ने खुले तौर पर आरोप लगाया है कि इस 30 लाख रुपये की सड़क के निर्माण के दौरान तय किए गए मानकों और दिशा-निर्देशों की पूरी तरह से अनदेखी की गई। निर्माण के वक्त बहुत ही घटिया स्तर की बालू, गिट्टी और नाममात्र के सीमेंट का प्रयोग किया गया था, जिसका परिणाम आज सबके सामने है।
ग्रामीणों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि इस सड़क के निर्माण कार्य की किसी स्वतंत्र एजेंसी से उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही, भ्रष्टाचार में लिप्त दोषी संवेदक (ठेकेदार) और कार्य की अनदेखी करने वाले कनिष्ठ व सहायक अभियंताओं के खिलाफ कड़ी कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस सड़क की पूरी तरह से मरम्मत नहीं कराई गई, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।


_edited.jpg)



Comments