भारत-नेपाल सीमा पर साझा मोर्चा: SSB, बिहार पुलिस और नेपाल APF ने चलाया नशा मुक्ति अभियान, तस्करों को दी चेतावनी
- mdkashif3300
- Jun 27
- 3 min read


भारत-नेपाल सीमा पर साझा मोर्चा: SSB, बिहार पुलिस और नेपाल APF ने चलाया नशा मुक्ति अभियान, तस्करों को दी चेतावनी
भारत और नेपाल की खुली सीमा पर असामाजिक तत्वों और तस्करों की नकेल कसने के लिए सुरक्षा एजेंसियां अब एक नए और बड़े मिशन पर एक साथ मिलकर काम कर रही हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में मादक पदार्थों (ड्रग्स) के बढ़ते प्रभाव को रोकने और युवाओं को इस जानलेवा लत से बचाने के लिए भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा बलों ने एक बड़ी जंग छेड़ दी है। बिहार के किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड अंतर्गत सशस्त्र सीमा बल (SSB) के फतेहपुर बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) की ओर से मादक पदार्थों के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ एक विशेष संयुक्त नशा मुक्ति जागरूकता अभियान चलाया गया। इस अभियान में भारतीय सुरक्षा बल (एसएसबी), बिहार पुलिस और नेपाल पुलिस (एपीएफ) की टीमों ने एकजुट होकर हिस्सा लिया और सीमावर्ती गांवों के लोगों को जागरूक किया।
किशनगंज सीमावर्ती क्षेत्र की संवेदनशीलता और खुली सीमा की चुनौती
किशनगंज जिले का टेढ़ागाछ प्रखंड सीधे तौर पर नेपाल सीमा से सटा हुआ है। यह खुली सीमा होने के कारण तस्करों के लिए हमेशा से एक सुगम मार्ग रही है। हाल के दिनों में इस इलाके में युवाओं के बीच नशीले पदार्थों, प्रतिबंधित दवाओं और नेपाल से होने वाली अवैध शराब व नशीली चीजों की तस्करी के मामले बढ़े हैं। इसी गंभीर स्थिति को भांपते हुए एसएसबी की 12वीं वाहिनी के फतेहपुर बीओपी ने न केवल सुरक्षा गश्त बढ़ाई है, बल्कि सीमावर्ती समुदायों को इस लड़ाई में अपना भागीदार बनाने के लिए इस संयुक्त अभियान की शुरुआत की है।
तीनों सुरक्षा एजेंसियों के नेतृत्व में भव्य रैली
इस संयुक्त जागरूकता अभियान का नेतृत्व संयुक्त रूप से एसएसबी के इंस्पेक्टर राज कुमार, फतेहपुर थाना की सब-इंस्पेक्टर (एसआई) अदाहरी लोसो, थानाध्यक्ष सृष्टि और नेपाल सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) के सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई) अनिल कुमार ने किया। तीनों एजेंसियों के अधिकारियों और जवानों ने सीमावर्ती गांवों की गलियों और मुख्य मार्गों पर एक जागरूकता मार्च निकाला। मार्च के दौरान जवानों के हाथों में नशामुक्त समाज की अपील करने वाले बैनर और पोस्टर थे। रैली में स्थानीय ग्रामीणों, स्कूली बच्चों और युवाओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।
नशे की लत: परिवार, समाज और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा
रैली के उपरांत आयोजित एक नुक्कड़ सभा को संबोधित करते हुए अधिकारियों ने नशे के बहुआयामी खतरों पर विस्तार से प्रकाश डाला। एसएसबी इंस्पेक्टर राज कुमार ने कहा, "नशे की लत केवल एक व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नष्ट नहीं करती, बल्कि उसके पूरे परिवार को आर्थिक और सामाजिक रूप से बर्बाद कर देती है। सीमावर्ती क्षेत्रों में नशे की लत सीधे तौर पर अपराधों और सुरक्षा खतरों को बढ़ावा देती है क्योंकि तस्कर युवाओं को अपने जाल में फंसाकर उनसे गैर-कानूनी काम करवाते हैं।"
फतेहपुर थानाध्यक्ष सृष्टि और एसआई अदाहरी लोसो ने स्थानीय महिलाओं और अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों के व्यवहार में आने वाले किसी भी संदिग्ध बदलाव पर नजर रखें और यदि उन्हें किसी नशा बेचने वाले या तस्कर की जानकारी मिले, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण
नेपाल एपीएफ के एएसआई अनिल कुमार ने भारत-नेपाल मैत्री संबंधों और सुरक्षा सहयोग को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों देशों की पुलिस सीमा पर मादक पदार्थों की तस्करी को शून्य करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां केवल तस्करों को पकड़ सकती हैं, लेकिन समाज से नशे को पूरी तरह खत्म करने के लिए अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के प्रबुद्ध जनों को आगे आना होगा। जब तक युवाओं को सही मार्गदर्शन और रोजगार के अवसर नहीं मिलेंगे, तब तक वे इस जाल में फंसते रहेंगे।
नशामुक्त भारत और नेपाल का लिया संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी ग्रामीणों, युवाओं और सुरक्षा बलों के अधिकारियों ने एक सुर में नशामुक्त समाज के निर्माण की शपथ ली। उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि वे न तो स्वयं कभी किसी प्रकार के नशे का सेवन करेंगे और न ही अपने परिवार व गांव में किसी को ऐसा करने देंगे। उन्होंने भारत सरकार के 'नशामुक्त भारत अभियान' में सक्रिय रूप से सहयोग करने और तस्करों की सूचनाएं सुरक्षा बलों के साथ साझा करने का भरोसा दिया।
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