जीएमसीएच पूर्णिया के डॉक्टरों का कमाल: बिना बड़े ऑपरेशन के छोटी आंत से निकाला क्लिप का स्प्रिंग, 6 वर्षीय मासूम को मिला नया जीवन
- mdkashif3300
- Jun 23
- 4 min read

जीएमसीएच पूर्णिया के डॉक्टरों का कमाल: बिना बड़े ऑपरेशन के छोटी आंत से निकाला क्लिप का स्प्रिंग, 6 वर्षीय मासूम को मिला नया जीवन
सीमांचल के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल (जीएमसीएच) पूर्णिया में डॉक्टरों ने एक बार फिर अपनी काबिलियत और आधुनिक चिकित्सा तकनीक का लोहा मनवाया है। डॉक्टरों की एक जांबाज टीम ने छह वर्ष के एक मासूम बच्चे को नई जिंदगी दी है, जिसने अनजाने में खेल-खेल में कपड़े सुखाने वाले क्लिप का स्प्रिंग निगल लिया था। यह धातु का स्प्रिंग बच्चे के शरीर के भीतर जाकर उसकी छोटी आंत में बेहद नाजुक जगह पर फंस गया था। बच्चे की लगातार बिगड़ती स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने अत्यंत सूझबूझ का परिचय दिया और बिना कोई बड़ा ऑपरेशन (ओपन सर्जरी) किए आधुनिक तकनीक की मदद से स्प्रिंग को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। डॉक्टरों के इस सफल प्रयास की चौतरफा सराहना हो रही है।
खेल-खेल में हुआ बड़ा हादसा
घटना के संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार, अररिया जिले के रहने वाले रामजी चौबे के छह वर्षीय पुत्र अभिनव आर्य घर में खेल रहा था। इसी दौरान खेलते-खेलते उसने गलती से एक क्लिप का स्प्रिंग अपने मुंह में डाल लिया और वह उसे निगल गया। धातु का बना यह स्प्रिंग पहले बच्चे के गले से होते हुए पेट में पहुंचा और फिर आगे बढ़कर उसकी छोटी आंत में जाकर फंस गया। स्प्रिंग के आंत में फंसते ही बच्चे की हालत बिगड़ने लगी। उसे पेट में असहनीय दर्द, जी मिचलाने और बेचैनी जैसी गंभीर समस्याएं होने लगीं।
मासूम की बिगड़ती हालत और रेफरल का सफर
बच्चे की गंभीर स्थिति को देखकर घबराए परिजन उसे आनन-फानन में स्थानीय अररिया सदर अस्पताल ले गए। वहां प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने पाया कि मामला काफी संवेदनशील और जटिल है। अररिया सदर अस्पताल में इस तरह के मामलों के उपचार के लिए पर्याप्त संसाधन और विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने बच्चे को बेहतर इलाज और आधुनिक सुविधाओं से लैस राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल (जीएमसीएच) पूर्णिया रेफर कर दिया। परिजन बिना समय गंवाए बच्चे को लेकर पूर्णिया पहुंचे।
जीएमसीएच पूर्णिया के डॉक्टरों की त्वरित कार्रवाई
जीएमसीएच पूर्णिया के आपातकालीन विभाग में पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने तुरंत बच्चे को सर्जरी विभाग में स्थानांतरित किया। यहां वरिष्ठ सर्जन डॉ. तारकेश्वर प्रसाद और डॉ. विकास कुमार की टीम ने बच्चे का जिम्मा संभाला। डॉक्टरों ने बच्चे की आवश्यक जांचें, जिसमें एक्स-रे और अन्य अल्ट्रासाउंड टेस्ट शामिल थे, तुरंत करवाईं। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से देखा गया कि धातु का स्प्रिंग छोटी आंत के एक हिस्से में फंसा हुआ था। चूंकि स्प्रिंग नुकीला और धातु का था, इसलिए आंत के कटने या फटने का बड़ा खतरा बना हुआ था, जिससे आंतरिक रक्तस्राव या संक्रमण (पेरिटोनिटिस) हो सकता था। यह स्थिति बच्चे की जान के लिए बेहद घातक साबित हो सकती थी।
पारंपरिक सर्जरी के बजाय चुना आधुनिक रास्ता
आमतौर पर आंतों में बाहरी धातु की वस्तुएं फंसने पर डॉक्टरों को बड़ा ऑपरेशन (लैप्रोटॉमी) करना पड़ता है, जिसमें पेट को चीरकर आंत से वस्तु को बाहर निकाला जाता है। इस प्रक्रिया में मरीज को ठीक होने में काफी समय लगता है और संक्रमण का खतरा भी अधिक रहता है। लेकिन, डॉ. तारकेश्वर प्रसाद और डॉ. विकास कुमार की टीम ने बच्चे की उम्र और नाजुक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एक अलग और आधुनिक रास्ता चुनने का फैसला किया।
डॉक्टरों ने बिना पेट को पूरा खोले, केवल एक छोटा सा सूक्ष्म चीरा लगाया। इसके बाद विशेष आधुनिक उपकरणों और तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए आंत के भीतर फंसे स्प्रिंग को बेहद सावधानीपूर्वक नीचे की ओर सरकाना शुरू किया। डॉक्टरों की टीम ने बेहद धैर्य और सूक्ष्मता से काम लेते हुए स्प्रिंग को धीरे-धीरे आंत के अंतिम छोर तक पहुँचाया और अंततः मलद्वार (गुदा मार्ग) के रास्ते उसे शरीर से सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
बिना बड़ी सर्जरी के मिला नया जीवन
इस पूरी संवेदनशील प्रक्रिया की सबसे खास बात यह रही कि बच्चे को किसी भी प्रकार की बड़ी या जटिल सर्जरी से नहीं गुजरना पड़ा। डॉक्टरों ने न तो बच्चे का पेट चीरा और न ही आंतों को किसी तरह का नुकसान पहुँचने दिया। सफल उपचार के तुरंत बाद बच्चे को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया। कुछ ही घंटों में बच्चा पूरी तरह से सामान्य हो गया और उसका पेट दर्द भी पूरी तरह खत्म हो गया। वर्तमान में बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य रूप से भोजन कर रहा है।
परिजनों ने जताया आभार, डॉक्टरों ने कहा- 'बड़ी उपलब्धि'
सफल उपचार के बाद बच्चे के परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू थे। बच्चे के पिता रामजी चौबे और अन्य रिश्तेदारों ने जीएमसीएच के डॉक्टरों और पूरे मेडिकल स्टाफ का हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया। परिजनों ने कहा कि उनके बच्चे को डॉक्टरों के रूप में भगवान ने नया जीवन दिया है। वहीं, सफल ऑपरेशन को अंजाम देने वाले सर्जन डॉ. तारकेश्वर प्रसाद और डॉ. विकास कुमार ने इसे जीएमसीएच पूर्णिया की चिकित्सा सुविधाओं में आई प्रगति और पूरी टीम की एक बड़ी संगठित उपलब्धि बताया है।
अभिभावकों के लिए डॉक्टरों की जरूरी सलाह
इस सफल उपचार के बाद जीएमसीएच के शिशु रोग विशेषज्ञों और सर्जनों ने अभिभावकों के लिए एक महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। डॉक्टरों का कहना है कि घर में छोटे बच्चे अक्सर खेल-खेल में सिक्का, क्लिप, स्प्रिंग, सुई, पिन, छोटी खिलौना बैटरी या कंचे जैसी चीजें मुंह में डाल लेते हैं। ये चीजें बच्चों की श्वास नली या आहार नली में फंसकर जानलेवा साबित हो सकती हैं। इसलिए माता-पिता को हमेशा सतर्क रहना चाहिए और ऐसी छोटी व नुकीली चीजों को बच्चों की पहुंच से बिल्कुल दूर रखना चाहिए। यदि कोई बच्चा गलती से ऐसी चीज निगल ले, तो घरेलू नुस्खे अपनाने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टरों से संपर्क करना चाहिए।
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