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मधेपुरा में मंत्री दिलीप जायसवाल की दहाड़: बोले- 'भ्रष्टाचारियों का शुरू हुआ बिना दर्द वाला इलाज, 30 दिन में 60 अधिकारियों पर गिरी गाज'

mdkashif3300
Jun 21
2 min read


बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने मधेपुरा जिले के अपने सांगठनिक एवं प्रशासनिक दौरे के दौरान राजस्व विभाग में पसरे भ्रष्टाचार और अवैध उगाही पर एक बार फिर कड़ा प्रहार किया है। मधेपुरा में पत्रकारों और पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने अंचल कार्यालयों (Block Offices) में आम जनता को परेशान करने वाले और अवैध वसूली में संलिप्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अंतिम चेतावनी दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जो भी कर्मचारी दाखिल-खारिज (Mutation), परिमार्जन और जमाबंदी के नाम पर आम रैयतों से अवैध उगाही करेगा, उसे किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।


★ पदभार ग्रहण करने के 30 दिनों में 60 से अधिक पर गिरी गाज

राजस्व मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने विभाग की कमान संभालने के बाद की गई त्वरित कार्रवाइयों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि उन्हें जनता की शिकायतों और जमीनी हकीकत का भली-भांति अंदाजा है। उन्होंने बताया कि महज 30 दिनों के अल्प कार्यकाल के भीतर कर्तव्यहीनता, लापरवाही और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में लिप्त 60 से अधिक अंचल अधिकारियों (CO), राजस्व निरीक्षकों और अन्य कर्मियों के खिलाफ निलंबन, विभागीय जांच और स्थानांतरण जैसी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा चुकी है।


★ भ्रष्टाचारियों के खिलाफ शुरू हुआ 'बिना दर्द वाला इलाज' (पेनलेस ट्रीटमेंट)

मंत्री दिलीप जायसवाल ने भ्रष्टाचार के खिलाफ की जा रही कार्रवाई को एक अनूठा नाम देते हुए कहा, "बिहार में अब कामचोर और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ 'बिना दर्द वाला इलाज' (Painless Treatment) शुरू हो चुका है। यह एक ऐसा प्रशासनिक एक्शन है जिसके तहत बिना किसी हो-हल्ला के, गोपनीय जांच के आधार पर दोषियों को सीधे चिन्हित कर उनकी सेवाएं समाप्त की जा रही हैं या उन्हें निलंबित किया जा रहा है। यह इलाज आगे भी इसी रफ्तार से जारी रहेगा ताकि सिस्टम से जंग को पूरी तरह साफ किया जा सके।"


★ दाखिल-खारिज और परिमार्जन को पारदर्शी बनाना प्राथमिकता

दिलीप जायसवाल ने बताया कि भूमि सुधार विभाग का मुख्य उद्देश्य आम नागरिक को बिना किसी दलाल या रिश्वत के सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) और परिमार्जन के हजारों मामले अंचल कार्यालयों में लंबित रखकर आवेदकों को परेशान किया जाता था। अब विभाग ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था (Online Monitoring System) को मजबूत कर रहा है, जिससे पटना मुख्यालय से सीधे तौर पर यह देखा जा सकेगा कि किस अंचल में कितने दिनों से फाइलें लंबित पड़ी हैं और उन्हें क्यों खारिज किया गया।


★ मधेपुरा और सीमांचल में सुधार की उम्मीद

राजस्व मंत्री के मधेपुरा दौरे और उनके इस बयान के बाद स्थानीय निवासियों और भूमि स्वामियों में एक नई उम्मीद जगी है। सीमांचल और कोसी के इलाकों में भूमि विवाद हत्याओं और लंबे मुकदमों का मुख्य कारण रहे हैं। लोगों का मानना है कि यदि अंचल कार्यालयों में भ्रष्टाचार थमेगा, तो न केवल भूमि विवादों में कमी आएगी बल्कि आम लोगों को अपने कार्यों के लिए ब्लॉक के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। फिलहाल, राजस्व मंत्री के इस कड़े रुख से मधेपुरा समेत पूरे कोसी प्रमंडल के अंचल अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप का माहौल है।



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