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देवघर-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस का बदला रूट: किशनगंज और अलुआबाड़ी में ठहराव रद्द, ठाकुरगंज में उतरे परेशान यात्री

  • mdkashif3300
  • 2 days ago
  • 2 min read

Seemanchal Ki Awaz | Bihar News | Kishanganj | Train Route |


ठाकुरगंज: कटिहार-न्यू जलपाईगुड़ी रेलखंड पर यात्रा करने वाले रेल यात्रियों के लिए एक जरूरी खबर है। तकनीकी कारणों के चलते शुक्रवार को ट्रेन संख्या 15925 देवघर-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस का परिचालन उसके निर्धारित मार्ग के बजाय परिवर्तित (डायवर्टेड) रूट से किया गया। रेलवे प्रशासन द्वारा अचानक किए गए इस मार्ग बदलाव के कारण किशनगंज और अलुआबाड़ी रोड रेलवे स्टेशन पर इस ट्रेन का ठहराव (Stoppage) रद्द कर दिया गया, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।


पूर्णिया-अररिया-ठाकुरगंज होकर गुजरी ट्रेन: रेलवे सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ट्रेन अपने निर्धारित मार्ग कटिहार के बाद सामान्य रूट से हटकर पूर्णिया–अररिया कोर्ट–फॉरबिसगंज–ठाकुरगंज होते हुए न्यू जलपाईगुड़ी की ओर रवाना हुई। सुबह लगभग 6:10 बजे यह ट्रेन ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पहुंची। यहां केवल दो मिनट का ठहराव था, जिसके बाद ट्रेन को आगे न्यू जलपाईगुड़ी (NJP) के लिए रवाना कर दिया गया।


अचानक हुए इस मार्ग परिवर्तन के कारण ट्रेन में सवार सैकड़ों यात्रियों को बड़ी परेशानी उठानी पड़ी। विशेष रूप से वे यात्री जिन्हें किशनगंज या अलुआबाड़ी रोड स्टेशन पर उतरना था, उन्हें अचानक ठाकुरगंज स्टेशन पर ही उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा। इन यात्रियों में बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल थे।


सूचना न मिलने से भड़के यात्री: ठाकुरगंज स्टेशन पर उतरे यात्रियों ने रेलवे प्रशासन के खिलाफ नाराजगी व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि रूट डायवर्जन और स्टॉपेज रद्द होने की कोई भी पूर्व सूचना उन्हें नहीं दी गई थी। ट्रेन में यात्रा के दौरान अचानक उन्हें पता चला कि किशनगंज और अलुआबाड़ी में ट्रेन नहीं रुकेगी। ठाकुरगंज में उतरने के बाद यात्रियों को अपने गंतव्य (किशनगंज और अलुआबाड़ी) तक पहुंचने के लिए निजी वाहनों और टैक्सियों का सहारा लेना पड़ा, जिससे उन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी पड़ा।


स्थानीय नागरिकों और यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि ऐसे आपातकालीन रूट डायवर्जन या स्टॉपेज निरस्त होने की स्थिति में यात्रियों को समय रहते सूचना दी जाए। साथ ही प्रभावित स्टेशनों पर हेल्प डेस्क (सहायता काउंटर) खोले जाएं और यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक परिवहन जैसे रेलवे स्पेशल बस सेवा की सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि आम यात्रियों को अनावश्यक मानसिक और आर्थिक परेशानी न झेलनी पड़े।



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