बाढ़ में पल्स पोलियो अभियान पर संकट: बकाया भुगतान न मिलने से भड़कीं आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, काम का किया बहिष्कार
- mdkashif3300
- 2 days ago
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बाढ़ में पल्स पोलियो अभियान पर संकट: बकाया भुगतान न मिलने से भड़कीं आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, काम का किया बहिष्कार
भारत को पोलियो मुक्त बनाए रखने के लिए समय-समय पर चलाए जाने वाले राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान पर पटना जिले में ग्रहण लगता दिखाई दे रहा है। 28 जून (रविवार) से शुरू होने वाले पांच दिवसीय पल्स पोलियो अभियान (28 जून से 2 जुलाई) से ठीक पहले पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल अस्पताल में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अभियान के तहत घर-घर जाकर शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की दो बूंद दवा पिलाने की मुख्य जिम्मेदारी संभालने वाली आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी सहायिकाओं और अन्य संविदा स्वास्थ्यकर्मियों ने काम करने से पूरी तरह इनकार कर दिया है। आंदोलनकारी कर्मियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक उनका पुराना बकाया मानदेय जारी नहीं किया जाता, तब तक वे इस अभियान का हिस्सा नहीं बनेंगी।
दो चरणों का मानदेय और कोरोना काल का बकाया लंबित
बाढ़ अनुमंडल अस्पताल परिसर में प्रदर्शन कर रही आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है। कर्मियों के अनुसार, पिछले दो चरणों में चलाए गए पल्स पोलियो अभियान के दौरान उन्होंने पूरी मुस्तैदी से काम किया था, लेकिन उसका मानदेय (मेहनताना) आज तक उनके खातों में नहीं भेजा गया है।
इसके अतिरिक्त, आशा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कोरोना काल (COVID-19 महामारी) के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर किए गए विभिन्न स्वास्थ्य सर्वे और टीकाकरण कार्यों की प्रोत्साहन राशि का एक बड़ा हिस्सा भी आज तक लंबित पड़ा हुआ है। बार-बार गुहार लगाने के बाद भी सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहा है, जिससे तंग आकर उन्हें यह कड़ा कदम उठाना पड़ा है।
बाढ़ अनुमंडल अस्पताल में काम ठप, कर्मियों ने बोला धावा
पल्स पोलियो अभियान शुरू होने की नियत तारीख पर सुबह से ही आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी कर्मी बाढ़ अनुमंडल अस्पताल में एकत्रित हो गईं। उन्होंने वैक्सीन कैरियर (दवा ले जाने वाले बॉक्स) लेने से मना कर दिया और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारी कर्मियों ने दो-टूक कहा, "हम लगातार बिना पैसे के काम नहीं कर सकते। हमारे परिवारों के सामने भी भुखमरी की स्थिति है। सरकार हमसे काम तो लेती है लेकिन जब पैसे देने की बारी आती है, तो बजट की कमी का बहाना बना दिया जाता है। जब तक बकाया राशि का भुगतान हमारे बैंक खातों में नहीं हो जाता, हम एक भी बच्चे को पोलियो की दवा नहीं पिलाएंगे।"
प्रबंधन की चुप्पी से बढ़ा गतिरोध, बात करने से भी इनकार
पल्स पोलियो जैसे संवेदनशील राष्ट्रीय कार्यक्रम के ठप होने की कगार पर पहुंचने के बावजूद बाढ़ अनुमंडल अस्पताल प्रबंधन का रवैया गैर-जिम्मेदाराना बना हुआ है। पूरे विवाद पर अस्पताल के प्रभारी या उपाधीक्षक की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या बयान जारी नहीं किया गया है। जब स्थानीय मीडियाकर्मियों ने इस गतिरोध पर अस्पताल प्रबंधन से उनका पक्ष जानना चाहा, तो अधिकारियों ने कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया और मीडिया से दूरी बना ली। प्रबंधन की इस चुप्पी से हड़ताली स्वास्थ्यकर्मियों में आक्रोश और बढ़ गया है।
अभियान के प्रभावित होने से हजारों बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा
पल्स पोलियो अभियान की सफलता पूरी तरह से इन्हीं फ्रंटलाइन वर्कर्स (आशा और आंगनबाड़ी सेविका/सहायिका) पर निर्भर करती है। ये कर्मी चिलचिलाती धूप, बारिश और दुर्गम रास्तों को पार करते हुए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक पहुंचते हैं और बच्चों को दवा पिलाते हैं। बाढ़ अनुमंडल क्षेत्र में इन कर्मियों की हड़ताल के कारण हजारों बच्चे पोलियो खुराक पाने से वंचित रह सकते हैं। यदि यह गतिरोध जल्द ही सुलझाया नहीं गया, तो यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लक्ष्यों को एक बड़ा झटका होगा।
शीघ्र सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि सरकार और पटना के सिविल सर्जन को तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। आशा कार्यकर्ताओं की मांगें जायज हैं और उनके मानदेय का भुगतान समय पर होना चाहिए। प्रशासन को लिखित गारंटी या तुरंत भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर इस हड़ताल को समाप्त कराना चाहिए ताकि मासूम बच्चों को समय पर पोलियो की दवा पिलाई जा सके।

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