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बांका में संभावित सुखाड़ को लेकर प्रशासन अलर्ट: प्रभारी मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने की समीक्षा बैठक, दिए कड़े निर्देश

  • mdkashif3300
  • Jun 29
  • 3 min read

बांका में संभावित सुखाड़ को लेकर प्रशासन अलर्ट: प्रभारी मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने की समीक्षा बैठक, दिए कड़े निर्देश


मानसून के मौसम में जहां उत्तर बिहार और सीमांचल के कुछ जिलों में बाढ़ की आशंका बनी रहती है, वहीं दक्षिण बिहार के बांका जैसे जिलों में कम बारिश या मानसून की बेरुखी के कारण संभावित सुखाड़ (सूखे) का खतरा हमेशा मंडराता रहता है। यदि बारिश समय पर और पर्याप्त मात्रा में नहीं हुई, तो कृषि और पेयजल संकट की स्थिति भयावह हो सकती है। इसी गंभीर चुनौती से समय रहते निपटने और पूर्व तैयारियां पुख्ता करने के लिए बांका जिला प्रशासन अभी से पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है।


बांका समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) के सभागार में संभावित सुखाड़-2026 की पूर्व तैयारियों को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री सह बांका जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने की। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को साफ संदेश दिया कि प्राकृतिक चुनौतियों के बीच आम जनता और किसानों को किसी भी हाल में परेशानी नहीं होनी चाहिए।


सभी प्रमुख विभागों की तैयारियों की समीक्षा

बैठक के दौरान बांका के जिला पदाधिकारी (DM) ने प्रभारी मंत्री को जिले की भौगोलिक स्थिति और मानसूनी बारिश के ताजा आंकड़ों से अवगत कराया। जिलाधिकारी ने बताया कि संभावित सूखे की स्थिति से निपटने के लिए पेयजल, सिंचाई, कृषि, पशुपालन, स्वास्थ्य, विद्युत, नगर निकाय, आपदा प्रबंधन और ग्रामीण विकास जैसे सभी महत्वपूर्ण विभागों की पूर्व तैयारियों का विस्तृत मूल्यांकन किया गया है और एक समन्वित कार्ययोजना (Action Plan) तैयार की गई है।


पेयजल संकट को रोकने के लिए युद्ध स्तर पर काम

समीक्षा बैठक में सबसे अधिक जोर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पीने के पानी (पेयजल) की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर दिया गया। प्रभारी मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि जिले के सभी वार्डों में हर घर नल-जल योजना को पूरी तरह प्रभावी रखा जाए। इसके साथ ही:

1. जिले के सभी बंद और खराब पड़े चापाकलों (हैंडपंप) की तुरंत मरम्मत कराई जाए।

2. जल संकट वाले चिन्हित क्षेत्रों में नए चापाकल स्थापित किए जाएं।

3. ग्रामीण जलमीनारों का नियमित संचालन सुनिश्चित हो।

4. नगर निकायों को निर्देश दिया गया कि वे आपात स्थिति के लिए वाटर टैंकरों, स्टैंड पोस्टों और सार्वजनिक स्थानों पर अस्थायी प्याऊ की व्यवस्था पहले से तैयार रखें।


कृषि विभाग का 'प्लान-बी': वैकल्पिक फसलों की तैयारी

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यदि बारिश सामान्य से कम होती है, तो किसानों को नुकसान से बचाने के लिए 'वैकल्पिक फसल योजना' तैयार कर ली गई है। इसके तहत कम पानी में पकने वाली धान की किस्में, मक्का, दलहन (दालें) और तिलहन फसलों की सूची बनाई गई है। किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराने और कृषि वैज्ञानिकों के माध्यम से कम सिंचाई वाली फसलों को अपनाने के लिए ब्लॉक स्तर पर जागरूकता शिविर लगाए जाएंगे।


नलकूपों को चालू रखने और बिजली आपूर्ति के निर्देश

सिंचाई संकट को दूर करने के लिए लघु सिंचाई विभाग को जिले के सभी सरकारी नलकूपों (Tubewells) को चालू स्थिति में रखने का निर्देश दिया गया है। बिजली विभाग को सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कृषि फीडरों में कम से कम 16 से 18 घंटे निर्बाध बिजली मिले ताकि किसान खेतों की सिंचाई कर सकें। इसके अतिरिक्त, जल संरक्षण के तहत मनरेगा और जल-जीवन-हरियाली अभियान के जरिए तालाबों, आहर-पाइनों की उड़ाही और वर्षा जल संचयन के कार्यों में तेजी लाने को कहा गया है।


प्रशासनिक स्तर पर आपदा से निपटने की पूरी तैयारी

प्रभारी मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने बैठक के अंत में कहा कि सरकार हर परिस्थिति पर नजर बनाए हुए है। अगर मौसम ने साथ नहीं भी दिया और सूखा पड़ा, तब भी बांका प्रशासन पूरी मुस्तैदी और मानवीय संवेदनशीलता के साथ किसानों और पशुपालकों की मदद के लिए तैयार रहेगा। पशुओं के चारे और स्वास्थ्य के लिए भी विशेष चिकित्सा कैंप लगाने के निर्देश पशुपालन विभाग को दिए गए हैं।

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