फारबिसगंज के भागकोहलिया में जलजमाव का कहर: गंदे पानी के बीच चलने को मजबूर लोग, आक्रोशित ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन
फारबिसगंज (अररिया): बिहार के अररिया जिले के फारबिसगंज प्रखंड अंतर्गत भागकोहलिया पंचायत के वार्ड संख्या-7 में नाले की गंदगी और गंभीर जलजमाव ने स्थानीय लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। पिछले कई दिनों से नाले का गंदा, बदबूदार पानी मुख्य सड़क पर बह रहा है, जिससे पूरा इलाका अब एक गंदे तालाब में तब्दील हो चुका है। इस विकट स्थिति के चलते स्थानीय जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है और लोगों में प्रशासन के प्रति भारी रोष है।
तालाब बनी सड़क, रोजाना फिसलकर गिर रहे राहगीर
मुख्य सड़क पर घुटनों तक भरे नाले के गंदे पानी के कारण स्थानीय लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। राहगीरों को इसी दूषित पानी से होकर हर रोज गुजरना पड़ता है। पानी के नीचे सड़क पर बने गड्ढे दिखाई नहीं देने के कारण आए दिन लोग, विशेषकर बाइक और साइकिल सवार अनियंत्रित होकर गिर रहे हैं और चोटिल हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि नाले की सफाई न होने से यह समस्या महीनों से बनी हुई है, लेकिन बार-बार शिकायत करने के बाद भी पंचायत प्रशासन गहरी नींद में सोया हुआ है।
स्कूली बच्चों और महिलाओं की बढ़ी मुश्किलें, संक्रमण का खतरा
इस नारकीय स्थिति का सबसे बुरा असर छोटे स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। बच्चों को प्रतिदिन इसी गंदे नाले के पानी के बीच से गुजरकर स्कूल जाना पड़ रहा है, जिससे उनके कपड़ों के साथ-साथ किताबें भी खराब हो रही हैं। इसके अतिरिक्त, महिलाओं को पूजा-अर्चना के लिए मंदिर जाने या रोजमर्रा के आवश्यक घरेलू कार्यों के लिए इसी बदबूदार रास्ते से गुजरना पड़ता है। गंदे पानी में लगातार पैर भीगने के कारण स्थानीय लोगों में त्वचा रोग, मलेरिया, डेंगू और अन्य गंभीर संक्रमणों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर किया प्रदर्शन
प्रशासनिक उपेक्षा से तंग आकर आक्रोशित ग्रामीणों ने शनिवार को सड़क पर जमा होकर जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। स्थानीय ग्रामीणों ने पंचायत के जनप्रतिनिधियों और प्रखंड प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि जलनिकासी का कोई स्थाई समाधान जल्द नहीं निकाला गया, तो वे अपने आंदोलन को और उग्र करेंगे और चरणबद्ध तरीके से बेमियादी धरने पर बैठेंगे।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
नाले की तत्काल सफाई: जाम पड़े नालों की सिल्ट और कचरे को तुरंत हटाकर पानी का बहाव सुचारू किया जाए।
जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था: पंचायत स्तर पर जलनिकासी के लिए नालों का नए सिरे से निर्माण हो।
सड़क सुधार: जलभराव से जर्जर हो चुकी सड़कों की मरम्मत कराई जाए।
नियमित मॉनिटरिंग: पंचायत में सफाई व्यवस्था की साप्ताहिक निगरानी के लिए अधिकारियों की नियुक्ति की जाए।
भागकोहलिया वार्ड संख्या-7 की यह दुर्दशा स्पष्ट करती है कि स्थानीय निकाय और प्रशासनिक अमला छोटे-छोटे बुनियादी विकास कार्यों को लेकर कितना उदासीन है। अब देखना यह है कि इस जोरदार प्रदर्शन के बाद क्या प्रशासन की नींद टूटती है या फिर भागकोहलिया की जनता इसी नारकीय जीवन को जीने के लिए मजबूर रहेगी।

_edited.jpg)
Comments