अररिया में मानसून से पहले एक्शन में प्रशासन: फारबिसगंज, नरपतगंज और भरगामा में तटबंधों का जायजा, बाढ़-कटाव को लेकर दिए कड़े निर्देश
- mdkashif3300
- 9 hours ago
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अररिया में मानसून से पहले युद्धस्तर पर बाढ़ बचाव की तैयारियां: अधिकारियों ने नरपतगंज और भरगामा के संवेदनशील तटबंधों का किया भौतिक सत्यापन
अररिया/फारबिसगंज:
बिहार के सीमांचल इलाके में मानसून के आगमन की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। सीमांचल के जिलों में आने वाली विनाशकारी बाढ़ की विभीषिका से बचाव के लिए अररिया जिला प्रशासन इस बार पहले से कहीं अधिक सतर्क और अलर्ट मोड में नजर आ रहा है। संभावित बाढ़, जल-जमाव और नदियों द्वारा किए जाने वाले भू-कटाव की आशंकाओं को देखते हुए जिला स्तर से लेकर अनुमंडल स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों ने जमीन पर उतरकर बाढ़ पूर्व सुरक्षात्मक तैयारियों की समीक्षा शुरू कर दी है। इसी सिलसिले में सोमवार को फारबिसगंज अनुमंडल के अंतर्गत विभिन्न प्रखंडों के संवेदनशील और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का उच्चाधिकारियों द्वारा सघन निरीक्षण किया गया।
नरपतगंज, रानीगंज और भरगामा के तटबंधों का भौतिक सत्यापन
अररिया जिले के अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन) नवनील कुमार और फारबिसगंज के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) अभय कुमार तिवारी ने संयुक्त रूप से नरपतगंज, रानीगंज और भरगामा प्रखंड के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों, तटबंधों और नदी कटाव से प्रभावित स्थलों का व्यापक दौरा किया। अधिकारियों ने तटबंधों की वर्तमान स्थिति, सुरक्षात्मक कार्यों की प्रगति और जलस्तर बढ़ने की स्थिति में उठाए जाने वाले त्वरित कदमों का भौतिक सत्यापन किया।
भरगामा और नरपतगंज के बीच बहने वाली नदियों पर विशेष नजर
अधिकारियों के इस दल ने विशेष तौर पर भरगामा और नरपतगंज प्रखंडों के मध्य से होकर गुजरने वाली पहाड़ी नदियों और उनके तटबंधों (रिंग बांध) की स्थिति का बहुत बारीकी से मुआयना किया। निरीक्षण के दौरान बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल और जल संसाधन विभाग के कनिष्ठ अभियंताओं व संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक तकनीकी निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने उन विशिष्ट स्थलों पर सबसे अधिक ध्यान केंद्रित किया, जहाँ पिछले वर्षों के बाढ़ काल के दौरान भारी नदी कटाव हुआ था या जहाँ बांध टूटने व तटबंधों पर पानी का भारी दबाव बनने की गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई थी।
बाढ़ और आपदा से निपटने के लिए जिला प्रशासन तैयार
अपर समाहर्ता नवनील कुमार ने निरीक्षण के बाद पत्रकारों को बताया कि मानसून के दौरान सीमांचल की नदियों के जलस्तर में होने वाली अप्रत्याशित वृद्धि और किसी भी प्रकार की बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से तैयार है। राहत एवं बचाव सामग्री की उपलब्धता, नावों के निबंधन, ऊंचे शरण स्थलों (फ्लड शेल्टर) के सत्यापन और डॉक्टरों व दवाइयों की व्यवस्था सुनिश्चित कर ली गई है।
फारबिसगंज एसडीओ अभय कुमार तिवारी ने बताया कि तटबंधों की सुरक्षा के लिए नियुक्त चौकीदारों और अभियंताओं को चौबीस घंटे अलर्ट रहने को कहा गया है। किसी भी संवेदनशील तटबंध पर रिसाव या कटाव की स्थिति दिखने पर तुरंत आपदा नियंत्रण कक्ष को सूचित करने और बालू की बोरियों के जरिए कटाव निरोधक कार्य शुरू करने का आदेश दिया गया है, ताकि ग्रामीणों के जान-माल की मुकम्मल सुरक्षा की जा सके।

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